
फॉरेंसिक साइंटिस्ट (सौ. फ्रीपिक)
Career Opportunities: अक्सर हम ओटीटी, फिल्मों या थ्रिलर शो को देखना पसंद करते हैं जिसमें फॉरेंसिक साइंटिस्ट फिंगरप्रिंट, मोबाइल मैसेज या किसी कपड़े पर लगी धूल तक से सुराग निकाने की कोशिश करते हैं। इन सुरागों की पहचान करके सही तरीके से पढ़ने का काम फॉरेंसिक साइंस से जुड़े एक्सपर्ट करते हैं।
फॉरेंसिक साइंस एक ऐसी फील्ड है जो साइंस, टेक्नोलॉजी और लॉजिक तीनों के आधार पर खड़ी है। अगर आप भी इस फील्म में करियर बनाने की सोच रहे हैं तो यह आर्टिकल आपके काम आ सकता है।
देश में फॉरेंसिक एक्सपर्ट की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। ये एक्सपर्ट क्राइम सीन से मिले सबूतों को वैज्ञानिक तरीके से विश्र्लेषण करते हैं और रिपोर्ट तैयार करते हैं। यह रिपोर्ट पुलिस, जांच एजेंसियों और कोर्ट के लिए बहुत अहम होती है।
फॉरेंसिक साइंटिस्ट किसी क्राइम सीन यानी अपराध वाली जगहों से मिले सबूतों का विश्लेषण साइंटिफिक तरीके से करता है। इसके बाद जो रिपोर्ट देते हैं वे पुलिस, वकीलों, जजों को ये समझने में मदद करती है कि उस मामले में आखिर क्या हुआ था।
फॉरेंसिक साइंटिस्ट या एक्सपर्ट सेंट्रल और स्टेट फॉरेंसिक लैब, क्राइम इनवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट, इंटेलिजेंस ब्यूरो, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन, पुलिस डिपार्टमेंट, प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसियां, साइबर क्राइम सेल, कोर्ट लैबोरेटरी और रिसर्च संस्थान में काम कर सकते हैं।
यह भी पढ़ें:- यूपी में होमगार्ड के 41 हजार पदों पर होगी भर्ती, आवेदन से पहले जान लें योग्यता
जानकारी के अनुसार फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई देश के कई संस्थानों में की जा सकती है। जैसे नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (मुंबई), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी आदि।
फॉरेंसिक साइंस फील्ड में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कंप्यूटर साइंस जैसे अलग-अलग ब्रांच होते हैं। इन सभी का इस्तेमाल अपराधों की जांच करने या साक्ष्यों को चेक करने में किया जाता है। जिनको बाद में अदालत में पेश करते हैं।
फॉरेसिंग साइंस में फॉरेंसिक बायोलॉजी जिसमें डीएए, रक्त, बाल जैसे जैविक सबूत, फॉरेंसिक केमिस्ट्री में ड्रग्स, विस्फोटक और केमिकल, फॉरेंसिक पैथोलॉजी में मौत के कारणों का पता, फॉरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी में शरीर में जहर या ड्रग्स, डिजिटल फॉरेंसिक में मोबाइल, लैपटॉप, साइबर क्राइम, फॉरेंसिक एंथ्रो पोलॉजी में अवशेष और कंकाल तथा फॉरेंसिक ओडॉन्टोलॉजी में दांतों से पहनान से जुड़े सब्जेक्ट बढ़ाए जाते हैं।
अगर आप फॉरेंसिक साइंस पढ़ना चाहते हैं तो इसके लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी/मैथ्स होना जरूरी है। ज्यादातर कॉलेज में 12वीं में कम से कम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं।






