शिक्षा के क्षेत्र में क्या बदलाव हुए (सौ. एआई)
Budget 2026 vs 2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 पेश कर दिया है। इस बार शिक्षा क्षेत्र के लिए उम्मीदें काफी ज्यादा थीं। 2025 की तुलना में इस साल के बजट में न केवल आवंटन में फेरबदल हुआ है बल्कि डिजिटल लर्निंग और रिसर्च पर विशेष जोर दिया गया है।
साल 2025 के मुकाबले बजट 2026 में शिक्षा मंत्रालय के लिए आवंटित राशि में करीब 8-10% की वृद्धि देखी गई है। सरकार ने इस बार उच्च शिक्षा के साथ-साथ स्कूली बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए अधिक फंड जारी किया है।
2025 में डिजिटल शिक्षा की नींव रखी गई थी लेकिन 2026 में इसे और विस्तार दिया गया है। इस साल बजट का एक बड़ा हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कोडिंग को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए सुरक्षित रखा गया है जो पिछले साल सीमित था।
पिछले साल की तुलना में इस बार शिक्षा ऋण की प्रक्रियाओं को और सरल बनाया गया है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए लोन पर मिलने वाली ब्याज सब्सिडी में बढ़ोतरी की गई है जिससे विदेश में पढ़ाई और महंगे प्रोफेशनल कोर्स करना आसान होगा।
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2025 में शुरू हुए पीएम श्री स्कूलों के लिए इस बार फंड दोगुना कर दिया गया है। लक्ष्य यह है कि पिछले साल की तुलना में इस साल अधिक सरकारी स्कूलों को ‘स्मार्ट क्लासरूम’ और लैब सुविधाओं से लैस किया जाए।
शोधार्थियों के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के तहत आवंटन बढ़ाया गया है। 2025 में फेलोशिप की कमी को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए सरकार ने बजट 2026 में पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल छात्रों के लिए अतिरिक्त ग्रांट की घोषणा की है।
पिछले साल के मुकाबले स्किल इंडिया मिशन 2.0 पर फोकस बढ़ा है। नए बजट में उद्योगों की जरूरत के हिसाब से छात्रों को ट्रेनिंग देने के लिए 500 से अधिक नए स्किलिंग सेंटर खोलने का प्रावधान है जो रोजगार के अवसर बढ़ाएंगे।
2025 में पुराने संस्थानों के रखरखाव पर जोर था, जबकि 2026 के बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों में नए मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज खोलने के लिए जमीन और फंड का विशेष आवंटन किया गया है।
कुल मिलाकर बजट 2026 पिछले साल की तुलना में अधिक फ्यूचरिस्टिक नजर आता है। जहां 2025 का बजट रिकवरी पर केंद्रित था वहीं 2026 का शिक्षा बजट तकनीक, पहुंच और गुणवत्ता पर प्रहार करता है।