Maharashtra urban development (सोर्सः सोशल मीडिया)
Ahilyanagar Municipal Corporation: अहिल्यानगर नगर निगम आयुक्त द्वारा प्रस्तुत बजट से स्पष्ट होता है कि निगम की आय में लगातार कमी और खर्च में बढ़ोतरी के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। बजट में शहर के विकास के लिए राज्य और केंद्र सरकार के फंड पर अधिक निर्भरता दिखाई गई है, लेकिन इन फंड्स के उपयोग और आय बढ़ाने के लिए किसी ठोस योजना का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
नगर निगम प्रशासन द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किया गया 1710 करोड़ रुपये का मूल बजट आज स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। नगर आयुक्त यशवंत डांगे ने समिति के अध्यक्ष सुभाष लोंढे को बजट सौंपा। बजट में अच्छी सड़कें, मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
नगर निगम ने अपने दायित्वों को पूरा करने का भरोसा भी जताया है। साथ ही, विभिन्न विकास कार्यों के लिए सरकार से प्राप्त फंड्स में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम, गैर-दलित बस्ती सुधार योजना, महाराष्ट्र गोल्डन जुबली अर्बन उत्थान योजना, अल्पसंख्यक विकास निधि, 15वां वित्त आयोग, हाउसिंग फॉर ऑल, दलित बस्ती सुधार, आपदा न्यूनीकरण, पर्यटन विकास, जलापूर्ति, विधायक और सांसद निधि, सड़क सुरक्षा योजना, सिटी ब्यूटीफिकेशन और जिला पुस्तकालय भवन जैसी योजनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा निर्माण कार्य, ई-बस सेवा केंद्र, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सामाजिक विकास योजना जैसे प्रोजेक्ट पूरे करने का भी आश्वासन दिया गया है। नए प्रोजेक्ट्स के लिए अतिरिक्त फंड प्राप्त करने के प्रयास किए जाएंगे। इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त नागेंद्र मुटकेकर, मुख्य लेखा अधिकारी एवं उप आयुक्त मेहर लहरे, उप आयुक्त शाहजहां तड़वी, ऑडिटर गणेश लैचेट्टी और लेखा विभाग के अनिल लोंढे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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नगर निगम द्वारा पहले किए गए संपत्ति सर्वे में जिन संपत्तियों में अतिरिक्त निर्माण पाया गया और जहां किरायेदार रह रहे थे, उनसे संशोधित कर वसूला गया, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। नव-निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने इस कर का विरोध किया है। अब नगर आयुक्त द्वारा प्रस्तुत बजट में शहर की सभी संपत्तियों का पुनः सर्वे कराने की घोषणा की गई है।