WPI Inflation: खुदरा के बाद अब थोक महंगाई की मार, मई में 9.68% रहा WPI; ईंधन और अनाज की कीमतों ने बिगाड़ा खेल
Wholesale Price Index In May 2026: मंत्रालय ने बताया कि खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, रसायन एवं रासायनिक उत्पाद तथा बेसिक मेटल्स थोक महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहे।
- Written By: मनोज आर्या
मई में थोक महंगाई दर, (डिजाइन फोटो/ नवभारत)
Wholesale Price Index May 2026: मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने आज सोमवार, 15 जून को थोक महंगाई दर का आंकड़ा जारी किया। 2022-23 को नया बेस ईयर मानते हुए संशोधित थोक मूल्य सूचकांक (WPI) सीरीज लॉन्च की गई। मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मई 2026 में थोक महंगाई दर 9.68 प्रतिशत दर्ज की गई। नई डब्ल्यूपीआई सीरीज ने 2011-12 बेस ईयर वाली पुरानी सीरीज की जगह ली है। यह देश में उत्पादक मूल्य माप प्रणाली (Producer Price Measurement) में किए जा रहे व्यापक बदलाव का हिस्सा है।
संशोधित थोक महंगाई दर के साथ सरकार ने आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (ओपीपीआई), ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (आईपीपीआई) और सात सेवाओं के लिए सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) की नई सीरीज भी जारी की है।
मई 2026 में सालाना आधार पर थोक महंगाई
मंत्रालय के अनुसार, प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स की ओर यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सिफारिशों और वैश्विक मानकों के अनुरूप है। उपयोगकर्ताओं को नई सिस्टम अपनाने के लिए पर्याप्त समय देने के उद्देश्य से डब्ल्यूपीआई सीरीज को अगले पांच वर्षों तक जारी रखा जाएगा। मंत्रालय के मुताबिक, मई में अखिल भारतीय डब्ल्यूपीआई आधारित महंगाई दर सालाना आधार पर 9.68 प्रतिशत रही, जबकि सभी वस्तुओं का सूचकांक बढ़कर 109.9 पर पहुंच गया।
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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई तेज इजाफा
प्रमुख कैटेगरी में प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर मई में बढ़कर 4.99 प्रतिशत हो गई। वहीं, ईंधन और बिजली (फ्यूल एंड पावर) श्रेणी में महंगाई लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि विनिर्मित उत्पादों (मैन्यूफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स) की महंगाई दर इसी अवधि में बढ़कर 7.48 प्रतिशत दर्ज की गई। मंत्रालय ने बताया कि खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, रसायन एवं रासायनिक उत्पाद तथा बेसिक मेटल्स थोक महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहे। इसके अलावा, मई में डब्ल्यूपीआई फूड इंडेक्स के तहत खाद्य महंगाई दर 4.49 प्रतिशत दर्ज की गई।
WPI बास्केट में अब 957 आइटम
संशोधित सीरीज के तहत डब्ल्यूपीआई बास्केट में शामिल वस्तुओं की कुल संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है। नई सीरीज में बिजली श्रेणी के तहत सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा, पहली बार परमाणु ऊर्जा से उत्पादित बिजली को भी इस बास्केट में जगह दी गई है। सरकार ने ऊर्जा बास्केट में भी बदलाव करते हुए कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी से हटाकर ईंधन और ऊर्जा श्रेणी में शामिल कर दिया है।
संशोधित पद्धति में वस्तुओं के वेटेज तय करने के लिए ग्रॉस वैल्यू ऑफ आउटपुट (जीवीओ) का उपयोग किया गया है। साथ ही इंडेक्स तैयार करने और कीमतों के अनुपलब्ध होने की स्थिति से निपटने के लिए नई तकनीकों को अपनाया गया है। मंत्रालय ने बताया कि मई में सभी वस्तुओं के लिए नया आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (ओपीपीआई) 109.6 रहा, जबकि विनिर्माण क्षेत्र के लिए ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (आईपीपीआई) 104.9 दर्ज किया गया।
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खुदरा महंगाई दर में भी बढ़ोतरी
इससे पहले 12 जून को खुदरा महंगाई दर के आंकड़े सामने आए थे। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 3.93 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 3.49 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई थी। खुदरा महंगाई दर में हुई बढ़ोतरी का मुख्य कारण खाने और ईंधन की बढ़ती कीमतें हैं। यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक के मीडियम-टर्म महंगाई टारगेट के करीब रहा।
