वेल्थ क्रिएशन के लिए SIP ही सबसे बेस्ट, नवभारत से बातचीत में बोले LIC म्यूचुअल फंड के MD रवि कुमार झा
Ravi Kumar Jha On SIP: बीमा और वित्त क्षेत्र में दशकों का अनुभव रखने वाले रवि कुमार झा ने नवभारत के साथ बातचीत में कहा कि रिटेल निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म में वेल्थ बनाने का SIP सबसे अच्छा विकल्प है।
- Reported By: विष्णू भारद्वाज | Edited By: मनोज आर्या
LIC म्यूचुअल फंड के MD रवि कुमार झा, (AI जेनरेटेड इमेज)
LIC Mutual Fund MD Ravi Kumar Jha: देश की शीर्ष बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) द्वारा प्रमोट एलआईसी म्यूचुअल फंड (LIC Mutual Fund) देश का 37 वर्ष पुराना विश्वसनीय फंड हाउस है। इसका प्रबंधन कोष यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 50,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। प्रबंध निदेशक और सीईओ रवि कुमार झा के कुशल नेतृत्व में फंड हाउस ‘सेफ्टी फर्स्ट, बैलेंस्ड एंड कंसिस्टेंट रिटर्न’ की पॉलिसी के साथ बेहतर रिटर्न प्रदान कर लाखों निवेशकों के वेल्थ बना रहा है।
बीमा और वित्त क्षेत्र में तीन दशकों का गहन अनुभव रखने वाले रवि कुमार झा ने ‘नवभारत’ के साथ विशेष बातचीत में कहा कि रिटेल निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म में वेल्थ बनाने का सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) ही सबसे श्रेष्ठ माध्यम है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश के फंडामेंटल काफी मजबूत हैं और ग्रोथ तेज हो रही है।
लिहाजा लॉन्ग टर्म में इक्विटी मार्केट का आउटलुक अच्छा लग रहा है। शॉर्ट टर्म में अवश्य ईरान-अमेरिका वार के कारण उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रह सकती है, लेकिन यह गिरावट भी निवेशकों को निवेश के अच्छे अवसर प्रदान कर रही है। पेश हैं चर्चा के मुख्य अंश:-
सम्बंधित ख़बरें
FII बिकवाल, शेयर बाजार में लंबी तेजी मुश्किल! इस साल 26 बिलियन डॉलर की भारी निकासी
3 अगस्त से बदल जाएगी Share Market की टाइमिंग! F&O ट्रेडिंग और क्लोजिंग में बड़ा बदलाव, निवेशकों पर क्या असर?
बैंक ग्राहकों के लिए बड़ा बदलाव! RBI ने बदले डिपॉजिट नियम, 1 अक्टूबर से लागू होंगे नए प्रावधान
खुद का जनरेटर, खुद का डीजल फिर भी महावितरण को दो टैक्स! नागपुर में होटल संचालकों का फूटा गुस्सा
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते पिछले डेढ़ साल से भारी उतार-चढ़ाव के साथ भारतीय शेयर बाजार पर मंदी का दबाव बना हुआ है। क्या इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है?
हमें ऐसा नहीं लगता है क्योंकि देश के सभी आर्थिक इंडिकेटर मजबूती दिखा रहे हैं। जीएसटी कलेक्शन, ऑटो सेल, फोरेक्स रिजर्व, मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ सहित लगभग सभी आंकड़ों में अच्छी ग्रोथ दिख रही है। कार्पोरेट इंडिया के तिमाही रिजल्ट भी उम्मीद से बेहतर आ रहे हैं। तभी देश ने 7.8% की काफी अच्छी जीडीपी ग्रोथ हासिल की है। जिसके कारण भारतीय निवेशकों का भरोसा कायम है। इसका प्रमाण है 31,000 करोड़ रुपये से अधिक का मासिक एसआईपी निवेश और इक्विटी फंड निवेश में 26% की जोरदार वृद्धि। भा
रत की तेज ग्रोथ देख विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी कम होने लगी है और वे फिर से पॉजिटिव हो रहे हैं। हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक ने अनिवासी भारतीयों के लिए एफसीएनआर निवेश नियमों और स्वैप विंडो में ढील दी, उसके बाद मात्र 45 दिनों में ही भारत में लगभग 32 अरब डॉलर का कुल विदेशी पूंजी निवेश आ गया। इससे रुपये में भी स्थिरता आने लगी है।
ऐसे में आपको इक्विटी मार्केट का आउटलुक कैसा दिख रहा है?
देखिए, शॉर्ट टर्म में दो बड़ी चिंता है। पहली मानसून कमजोर रहने की थी, जो अब देश भर में अच्छी बारिश होने से कम होती दिख रही है। दूसरी बड़ी चिंता अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्ष और ऊंची तेल कीमतें हैं। यह संघर्ष किस दिशा में जाएगा, यह कोई निश्चित रूप से नहीं कह सकता है। लेकिन भारत इससे उत्पन्न चुनौतियों में निपटने के साथ ग्रोथ तेज करने में सफल हो रहा है। इस कारण मार्केट का आउटलुक लॉन्ग टर्म में तो काफी अच्छा दिख रहा है। तभी भारतीय निवेशक गिरावट के इस दौर को एक अवसर मान निचले स्तरों पर अपना निवेश बढ़ा रहे हैं।
आज प्रॉपर्टी में बढ़ती आपूर्ति के कारण रिटर्न नहीं मिल रहा है। भारी तेजी के बाद गोल्ड-सिल्वर में भी गिरावट आ गयी है। ऐसी स्थिति में रिटेल निवेशक के लिए लंबी अवधि में वेल्थ बनाने के लिए आप सबसे अच्छा माध्यम किसे मानते हैं?
हमारा मानना है कि रिटेल निवेशक के लिए नियमित बचत पर वेल्थ बनाने और अपने बच्चों के सपनों का साकार करने के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड एसआईपी से बेस्ट कोई दूसरा तरीका नहीं है। जिसमें लिक्विडिटी और सेफ्टी के साथ उचित रिटर्न मिलता है। प्रॉपर्टी लेना आसान है, लेकिन बेचना आसान नहीं है। जबकि इक्विटी एसआईपी में पिछले तीन-चार दशकों में यह प्रमाणित हुआ है कि जिसने भी लंबी अवधि तक निवेश किया, महंगाई दर को मात देते हुए उसकी अच्छी वेल्थ बनी है।
एसआईपी में तो आपको बैलेंस्ड या मल्टी एसेट फंड में इक्विटी, डेट के साथ गोल्ड-सिल्वर में भी निवेश का अवसर मिलता है। इसलिए वेल्थ बनाने के लिए एसआईपी निवेश का सबसे अच्छा अनुशासित तरीका है।
SIP निवेश में निवेशक अक्सर क्या गलती करते हैं और क्या सावधानी रखनी चाहिए?
कई एसआईपी निवेशक अक्सर बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण इमोशन में आकर गलती कर बैठते है। आज डिजिटल होने के बहुत से फायदे हैं तो यह नुकसान भी है, बहुत से निवेशकों को रोज अपनी एनएवी चेक करने की आदत रहती है और बाजार में कभी भारी गिरावट आने पर वे घबराहट में बिक्री कर डालते हैं। इसलिए यदि आपने रिटायरमेंट, बच्चों की शिक्षा और शादी, प्रॉपर्टी सहित परिवार की भविष्य की जरूरतों के अनुसार 15-20 या 25 साल का लक्ष्य तय कर एक विश्वसनीय म्यूचुअल फंड के जरिए एसआईपी निवेश शुरू किया है तो रोज-रोज देख चिंतित नहीं होना चाहिए।
तेजी-मंदी तो बाजार का स्वभाव है। मंदी में एसआईपी निवेश जारी रहने पर आपको अधिक यूनिट मिलती है और तेजी आने पर कंपाउंडिंग ग्रोथ का डबल फायदा मिलता है और तभी लंबी अवधि में अच्छी वेल्थ बनती है।
एलआईसी म्यूचुअल फंड में निवेशक पूंजी सुरक्षा के लिए आप क्या निवेश नीति अपनाते है?
देखिए, हमारी प्रमोटर कंपनी एलआईसी में शुरू से ही यह सिखाया जाता है कि हमारे पास आया यह पैसा देश के छोटे निवेशकों की जिंदगी भर की जमा पूंजी है, भले ही रिटर्न थोड़ा कम मिले, लेकिन उसके मूलधन की सुरक्षा तो हर हालत में करनी ही है। उसकी पूरी सेफ्टी के साथ कुछ बेहतर रिटर्न अवश्य मिलना चाहिए। एलआईसी की इसी अप्रोच को हमारी रिसर्च और निवेश टीम अपनाती है तथा निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न के साथ वेल्थ बनाने की कोशिश करती है।
विगत वर्षों में घाटे वाली कंपनियों के अनेक महंगे आईपीओ आए और उनमें निवेश कर कई फंड हाउस ने भारी घाटा उठाया। आपका इस बारे में क्या मत है?
यह भी पढ़ें: FII बिकवाल, शेयर बाजार में लंबी तेजी मुश्किल! इस साल 26 बिलियन डॉलर की भारी निकासी
हम कभी भी ऐसी घाटे वाली या हाई वैल्यूएशन वाली कंपनियों के आईपीओ में निवेश नहीं करते हैं। जैसा कि मैंने पहले कहा कि हम बाजार में निवेश करते समय एलआईसी की ‘सेफ्टी फर्स्ट’ अप्रोच के साथ हमेशा सही वैल्यू और ग्रोथ पर सबसे अधिक फोकस करते हैं।
