बिजनेसमैन निरंजन हीरानंदानी व जितेंद्र मेहता (सोर्स: सोशल मीडिया)
Real Estate Budget 2026: तमाम आशाओं अपेक्षाओं के बीच रविवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। देश की अर्थव्यवस्था में कृषि के बाद दूसरे नंबर पर योगदान देने वाले रियल एस्टेट सेक्टर की कई मांगो को न माने जाने के बावजूद इस बजट को आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला बताया गया है। मुख्य रूप से इस बजट में बड़े शहरों की बजाय छोटे शहरों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। अफोर्डेबल एवं सस्टेनेबल हाउसिंग के लिए पीएम आवास योजना को आगे बढ़ाते हुए 69 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
निर्मला के इस बजट में टियर 2 टियर 3 शहरों के लिए निर्मल साबित होगा। छोटे शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास एवं आवास योजनाओं के माध्यम से आर्थिक विकास पर जोर देने का प्लान है।
रियल एस्टेट सेक्टर की राष्ट्रीय संस्था नरेडको के चेयरमेन डॉ निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 आत्मनिर्भर भारत के लिए एक ठोस रोड मैप तैयार करता है, जिसमें बुनियादी ढांचे के विकास के साथ क्षेत्रीय रूप से एकीकृत विकास और लघु एवं मध्यम उद्यमों के सशक्तिकरण पर जोर दिया गया है। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय 12।2 लाख करोड़ होने से रियल एस्टेट, निर्माण, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध उद्योगों सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मजबूत सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
डॉ. हीरानंदानी ने कहा कि महानगरों पर पारंपरिक ध्यान केंद्रित करने के बजाय, बजट में नगर आर्थिक क्षेत्रों (सीईआर) के निर्माण के माध्यम से क्षेत्रीय आर्थिक विकास की दिशा में एक परिवर्तनकारी बदलाव को गति दी गई है। इससे उनके आसपास के ग्रामीण क्षेत्र भी आर्थिक प्रगति से जुड़ेंगे। शहरी अर्थव्यवस्थाओं के विस्तार, सुगम आवागमन और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), सेवा क्षेत्रों की क्षमता से वाणिज्यिक रियल एस्टेट की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
बजट में रसद एवं भंडारण अवसंरचना में किए गए 75,000 करोड़ रुपये के भारी निवेश से बहुविध फूड पार्कों, उन्नत शीत श्रृंखलाओं और आधुनिक भंडारण सुविधाओं के विकास को बढ़ावा मिलेगा।
क्रेडाई एमसीएचआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जितेंद्र मेहता ने बजट 2026-27 को इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट क्षेत्र को “डी-रिस्क” करने की दिशा में एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक बताया। मेहता ने कहा कि पूंजीगत व्यय को रिकॉर्ड 12.2 लाख करोड़ तक बढ़ा और इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की शुरुआत कर निर्माण क्षेत्र में क्रेडिट फ्लो को लेकर उद्योग की लंबे समय से चली आ रही चिंता का सीधे समाधान किया है। सार्वजनिक क्रेडिट गारंटी ऋणदाताओं और डेवलपर्स के बीच विश्वास की खाई को पाटेगी।इससे परियोजनाओं की पूर्णता में तेजी लाएगी। मेहता ने कहा कि नए डानकुनी–सूरत फ्रेट कॉरिडोर से लेकर टियर-2 और टियर-3 शहरी केंद्रों पर विशेष फोकस किया गया है।
क्रेडाई एमसीएचआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा कि किफायती आवास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। महानगरों में अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा बदल गई है जबकि सरकार के नियम पुराने मानक पर ही हैं। मध्यम व निम्नवर्ग के लिए बड़ी चिंता व चेतावनी की बात है।
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नाइट फ्रैंक इंडिया के अंतर्राष्ट्रीय पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा, कि बजट में बुनियादी ढांचे के विकास पर दिए गए जोर दिया गया है। हालांकि बजट में रियल एस्टेट के लिए कोई विशेष प्रोत्साहन पेश नहीं किया गया है, खासकर भारत में किफायती आवास को बढ़ावा देने के लिए, जो पहले से ही इस क्षेत्र के लिए चिंता का विषय रहा है।
नाहर ग्रुप की उपाध्यक्ष, NAREDCO-महाराष्ट्र की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मंजू याग्निक ने कहा कि सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ कर 12.2 लाख करोड़ होने से इसका लाभ रियल एस्टेट सेक्टर को भी होगा। सिटी इकोनॉमिक रीजन को विकसित करने पर फोकस है जिसे 5,000 करोड़ के आवंटन से सपोर्ट मिलेगा। साथ ही सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और डंकुनी को सूरत से जोड़ने वाले नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर शुरू होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में काफी सुधार होगा और नए रियल एस्टेट ग्रोथ कॉरिडोर खुलेंगे।
– नवभारत लाइव के लिए मुंबई से सूर्यप्रकाश मिश्र की रिपोर्ट