
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (सौजन्य : सोशल मीडिया)
नई दिल्ली : इन दिनों भारत के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट देखी गई है, जो चिंता का विषय बन चुका है। हाल ही में देश के केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक सर्वे में इस बात का खुलासा किया है। इस सर्वे के अनुसार पता चला है कि कई सेक्टर्स में प्रोडक्शन और डिमांड में कमी दर्ज हुई है, जिसके कारण देश की इकोनॉमिक ग्रोथ भी धीमी होने की संभावना है। इसका सीधा असर ना केवल बिजनेस पर पड़ेगा बल्कि इससे रोजगार के अवसर भी इफेक्ट हो सकते हैं।
केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में एक सर्वे किया है, जिसमें 1300 मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के डेटा का समावेश है। इस सर्वे के अनुसार पता चला है कि फाइनेंशियल ईयर
2024-25 की पहली और दूसरी तिमाही में इन कंपनियों की बढ़त में कमी दर्ज हुई है। इस बात का सीधा मतलब ये है कि कंपनियों के प्रोडक्शन और सेल्स में पहले के मुकाबले कमी आयी है। साथ ही मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई , जिससे इस सेक्टर की एक्टिविटीज को आकलन किया जाता है, वो भी धीरे धीरे घटता हुआ नजर आ रहा है। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में पॉजिटिव हालात कम हो रहे हैं।
आरबीआई के सर्वे के अनुसार, कंपनियों के प्रोडक्शन में जो पॉजिटिव और नेगेटिव इफेक्ट है, उसका डिफरेंस यानी नेट रिस्पॉन्स साल 2024-25 की पहली तिमाही में 27.9 प्रतिशत से घटा है। साथ ही ये आंकड़े दूसरी तिमाही में भी घटकर 22.9 प्रतिशत हो गए है। पिछले फाइनेंशियल ईयर की चौथी तिमाही में ये अंतर 34.4 प्रतिशत का था। जिससे साफ तौर पर पता चलता है कि कंपनियों के प्रोडक्शन में गिरावट आयी है। सबसे बड़ा चिंता का कारण ये भी है कि कंपनियों ने तीसरी और चौथी तिमाही में प्रोडक्शन कैपेसिटी में बढ़त आने की उम्मीद में काफी कमी आने की बात स्वीकारी है।
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आरबीआई की सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे माल की कीमतें, फाइनेंसिंग के खर्च और सैलरी पेमेंट के दबाव में अब कमी आयी है। जिसके कारण कंपनियों की सेल्स प्राइस और प्रॉफिट होने की उम्मीद थोड़ी कम हुई हैं। रिजर्व बैंक के इस सर्वे में शामिल मैन्यूफैक्चरर ने साल 2024-25 की चौथी तिमाही और 2025-26 की पहली तिमाही के लिए प्रोडक्शन, ऑर्डर, एम्पॉल्यमेंट, क्षमता उपयोग और समग्र व्यवसाय की स्थिति के बारे में बेहतर उम्मीद जतायी है। हालांकि इस सेक्टर पर इनपुट लागत का दबाव पहले की ही तरह बना रहेगा।






