आरबीआई के पूर्व गवर्नर का बयान, बोले – भारत को घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग और रोजगार सृजन पर दें जोर
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि नरेन्द्र मोदी सरकार की पहल ‘मेक इन इंडिया' के बारे में कहा है कि, "ये इरादा अच्छा है। मुझे लगता है कि बुनियादी संरचना जैसे कुछ क्षेत्रों में हमने बहुत कुछ किया है जो उपयोगी रहा है। लेकिन हमें अन्य क्षेत्रों के बारे में भी जांच करनी होगी।''
- Written By: अपूर्वा नायक
आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (सौजन्य : सोशल मीडिया)
नई दिल्ली : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने गुरूवार को भारत के इंफ्रास्कचर को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने बयान दिया है कि पिछले 10 साल में इंफ्रास्कचर जैसे सेक्टर में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन लोकल मैन्यूफैक्चरिंग और रोजगार जनरेशन को बढ़ावा देने के लिए अन्य सेक्टर में ज्यादा कोशिश करने की जरूरत है।
राजन ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा कि सरकार का वस्तु एवं सेवा उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करना अच्छी बात है लेकिन इस काम को सही ढंग से अंजाम देना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने नरेन्द्र मोदी सरकार की पहल ‘मेक इन इंडिया’ पर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ‘‘मैं कहूंगा कि इरादा अच्छा है। मुझे लगता है कि बुनियादी संरचना जैसे कुछ क्षेत्रों में हमने बहुत कुछ किया है जो उपयोगी रहा है। लेकिन हमें अन्य क्षेत्रों के बारे में भी जांच करनी होगी।”
मेक इन इंडिया
उन्होंने कहा कि अन्य क्षेत्रों में जरूरी कदमों के बारे में आलोचकों से जानकारी जुटानी चाहिए और उसके हिसाब से काम करना चाहिए। उन्होंने कारोबारी सुगमता को बेहतर करने की भी वकालत की। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने इसे एक पैकेज बताते हुए कहा कि यह आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम उसपर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो मुझे लगता है कि इससे ‘मेक इन इंडिया’ की अवधारणा मजबूत होगी।”
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विश्व बैंक के कारोबारी
इस समय अमेरिका स्थित शिकॉगो बूथ में वित्त के प्रोफेसर राजन ने कहा कि सरकार को कारोबारियों से उनके सामने आने वाली कठिनाइयों के बारे में पूछना चाहिए, सिर्फ विश्व बैंक के कारोबारी सुगमता से जुड़े बिंदुओं पर ही नहीं चलना चाहिए।
तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था
भारत को इस दशक में तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सात प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि के पर्याप्त होने के बारे में पूछे गए सवाल पर राजन ने कहा, ‘‘यदि हम 7 प्रतिशत की दर से बढ़ते हैं, तो हम दो-तीन वर्षों में जर्मनी और जापान से आगे निकल जाएंगे। यह कोई ऐसी चीज नहीं है जो संभावना के दायरे से बाहर हो।”
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विकसित राष्ट्र
इसके साथ ही राजन ने ये भी कहा है कि, ‘‘हालांकि सबसे ज़्यादा चिंता की बात यह है कि जब हम विकसित राष्ट्र कहते हैं तो विकसित होने का क्या मतलब है? यह भी एक बदलता हुआ पैमाना है। इसके अलावा हम 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लिए उच्च बढ़त कहां से उत्पन्न करेंगे।”
आम सहमति को मजबूर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस सवाल पर कि क्या मौजूदा गठबंधन सरकार आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा सकती है, राजन ने कहा कि गठबंधन की राजनीति अधिक आम सहमति को मजबूर कर सकती है जिसके लिए ‘अधिक सजग, अधिक संवेदनशील और चतुर सरकार’ की जरूरत होगी।
शिक्षा पर ध्यान केंद्रित
उन्होंने कहा कि सबसे अधिक सुधारवादी सरकार रही पी वी नरसिम्हा राव की सरकार को भारी बहुमत हासिल नहीं था, लेकिन उसने सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए कई सहयोगी दलों को एक साथ लाने का काम किया। उन्होंने मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में सबसे जरूरी सुधार के बारे में पूछे जाने पर कहा कि सबसे अधिक जरूरत शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
