Budget 2026: संत रविदास का नाम लेकर निर्मला सीतारमण ने शुरू किया भाषण, कहा- गरीबी हटाने के लिए हमने काम किए

Budget Speech Live: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'माघ पूर्णिमा और गुरु रविदास जयंती के पावन अवसर पर मैं बजट पेश कर रही हूं। भारत में पिछले साल आर्थिक स्थिति अच्छी रही है।'
Nirmala Sitharaman began her speech by invoking the name of Saint Ravidas
निर्मला सीतारमण
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Nirmala Sitharaman Speech Live: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "माघ पूर्णिमा और गुरु रविदास जयंती के पावन अवसर पर मैं आज बजट पेश कर रही हूं। पिछले साल भारत की आर्थिक स्थिति अच्छी रही है।" उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार पिछले 12 साल से निवेश बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है।

7% ग्रोथ रेट की दर से बढ़ी देश की अर्थव्यवस्था

केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, "पीएम मोदी के नेतृत्व में कई प्रकार के बदलाव किए गए हैं। आत्मनिर्भरता हमारी अर्थव्यवस्था का मूल मंत्र है। सरकार के फैसलों से हमने नागरिकों को लाभ पहुंचाने की पूरी कोशिश की है। पिछले साल देश की अर्थव्यवस्था 7 फीसदी ग्रोथ रेट की दर से बढ़ी है।"

आत्मनिर्भरता को बनाया मार्गदर्शक

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "आत्मनिर्भरता को मार्गदर्शक सिद्धांत मानते हुए, हमने घरेलू विनिर्माण क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है तथा आयात पर निर्भरता कम की है। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि सरकार के हर कदम का सीधा लाभ नागरिकों तक पहुंचे। हमने रोजगार सृजन, कृषि उत्पादकता, घरेलू क्रय शक्ति और लोगों को सार्वभौमिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कई सुधार किए हैं। इन प्रयासों से लगभग 7% की उच्च विकास दर हासिल हुई है और गरीबी कम करने तथा नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।"

विकसित भारत की ओर बढ़ रहा देश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, जहां आकांक्षा और समावेशन के बीच संतुलन बनाए रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत को वैश्विक बाजारों से गहराई से जुड़ा रहना होगा, ताकि निर्यात बढ़े और विदेशी निवेश आकर्षित हो।

उन्होंने कहा कि सरकार ने वित्तीय अनुशासन और मौद्रिक स्थिरता बनाए रखते हुए सार्वजनिक निवेश पर जोर दिया है। साथ ही, नई तकनीकें उत्पादन बढ़ा रही हैं, लेकिन इससे पानी और ऊर्जा की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, जिसे संतुलित और सतत तरीके से प्रबंधित करना जरूरी है।

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