
आज शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Nifty 50 and Sensex intraday movement: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। प्रमुख आईटी कंपनियों के तीसरी तिमाही के शानदार नतीजों की उम्मीद में सेंसेक्स और निफ्टी मजबूती के साथ खुले थे। हालांकि, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीतियों के कारण बाजार अपनी बढ़त को बरकरार नहीं रख सका। निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बनने से सूचकांकों ने अपनी शुरुआती तेजी खो दी और लाल निशान में कारोबार करने लगे।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 250 अंकों की बढ़त के साथ खुला था और निफ्टी ने 25,800 का स्तर पार किया था। लेकिन सुबह 10:12 बजे तक एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स 90.05 अंक गिरकर 83,788.12 के स्तर पर आ गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी50 भी 37.50 अंकों की गिरावट के साथ 25,752.75 पर पहुंच गया, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गईं।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणियां बाजारों को प्रभावित कर रही हैं। ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने की उनकी घोषणा ने वैश्विक व्यापार में डर पैदा किया है। ट्रंप द्वारा टैरिफ का बार-बार इस्तेमाल करना संदेश देता है कि दंडात्मक नीतियों का यह सिलसिला फिलहाल थमता नहीं दिख रहा।
बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच इटरनल के शेयरों में सबसे अधिक 2.98% की तेजी दर्ज की गई। सरकारी दिग्गज स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयर भी 0.79% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। इसके अलावा टेक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों ने शुरुआती मिनटों में बाजार को सहारा देने का भरपूर प्रयास किया।
लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में 2.28% की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई जिसने बाजार की धारणा को कमजोर किया। एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर भी 2.13% गिर गए, जबकि भारती एयरटेल और ट्रेंट में 1% से अधिक की कमजोरी रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे भारी भरकम शेयर में 1.12% की गिरावट ने निफ्टी को नीचे खींचने में मुख्य भूमिका निभाई।
बाजार के लिए एक सकारात्मक खबर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की ओर से आई जिन्होंने व्यापार समझौते की पुष्टि की। उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध है और वार्ता 13 जनवरी से शुरू होगी। इस खबर के बाद बाजार में एक संक्षिप्त उछाल देखा गया क्योंकि द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों में स्थिरता की उम्मीद जगी है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में तीसरी तिमाही के परिणाम शेयरों में विशिष्ट हलचल पैदा करेंगे। ट्रंप का फेड प्रमुख जेरोम पॉवेल के प्रति व्यवहार और अप्रत्याशित फैसले अमेरिकी बाजार के साथ भारतीय बाजार पर भी दबाव बनाएंगे। निवेशकों को अब वैश्विक घटनाक्रमों के साथ-साथ कंपनियों के तिमाही आय आंकड़ों पर पैनी नजर रखने की सलाह दी जा रही है।






