मस्क को ट्रंप के खिलाफ बोलना पड़ा भारी, 150 बिलियन डॉलर का नुकसान

अमेरिकी सरकार के नए बिल 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल' को लेकर ट्रंप और मस्क के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इसे लेकर दोनों अलग-अलग दावे कर रहे हैं। इसी बीच मस्क को 150 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है।
मस्क को ट्रंप के खिलाफ बोलना पड़ा भारी, 150 बिलियन डॉलर का नुकसान
डोनाल्ड ट्रंप, एलन मस्क (फोटो- सोशल मीडिया)
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वाशिंगटन: अरबपति बिजनेसमैन एलन मस्क और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच विवाद गहराता जा रहा है। इसी बीच मस्क को ट्रंप के खिलाफ बोलना भारी पड़ता नजर आ रहा है। इस विवाद के चलते मस्क की कंपनी टेस्ला के शेयरों में गिरावट आई है जिससे उन्हें 150 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है।

डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2025 में दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद एलन मस्क को अपनी सरकार में शामिल किया था। ट्रंप ने फिजूल सरकारी खर्च पर रोक लगाने का काम मस्क को दिया था और उन्हें डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) का प्रमुख बनाया था। मस्क ने DOGE में केवल 130 दिन काम किया और इस दौरान उन्होंने कई विवादित फैसले किए। इन 130 दिनों में मस्क और ट्रंप के रिश्ते खराब हो गए और वे सरकार से अलग हो गए। तभी से ही दोनों एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं।

9 प्रतिशत तक गिरे टेस्ला के शेयर

ट्रंप के साथ चल रहे विवाद का असर अब मस्क के व्यापार पर भी दिखने लगा है। निवेशकों को डर है कि इस विवाद का सीधा असर मस्क की कंपनियों के व्यापार पर पड़ सकता है, इसलिए वे इसमें पैसा लगाने से बच रहे हैं। इसके चलते टेस्ला के शेयरों में 9 प्रतिशत तक गिरावट आई है। इससे मस्क को 150 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों के बीच विवाद बढ़ता है तो मस्क की दूसरी कंपनियों SpaceX, Neuralink और X को भी भविष्य में नुकसान उठाना पड़ सकता है।

वन बिग ब्यूटीफुल बिल पर खिंची तलवार

ट्रंप और मस्क के बीच हाल के दिनों में वन बिग ब्यूटीफुल बिल पर विवाद चल रहा है। ट्रंप ने गुरुवार को वन बिग ब्यूटीफुल बिल के जरिए मस्क पर जमकर निशाना साधा। ट्रंप ने कहा कि टेस्ला के सीईओ हमेशा से बिल के प्रमुख प्रावधानों से अवगत थे, खासतौर पर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) मैंडेट में प्रस्तावित कटौती के बारे में।

हालांकि मस्क ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रस्तावित बिल उन्हें एक बार भी नहीं दिखाया गया था और इसे रात के अंधेरे में इतनी तेजी से पारित कर दिया गया कि कांग्रेस में लगभग कोई भी इसे पढ़ भी नहीं सका।

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