दिल्ली दंगों की आरोपी गुलफिशा फातिमा समेत चार लोग रिहा, फूल-मालाओं से हुआ स्वागत, देखें VIDEO

Delhi Riots Case: अदालत ने गौर किया कि जमानत की सभी शर्तों का पालन किया गया था और दिल्ली पुलिस द्वारा जमानतदारों और दस्तावेजों की सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद उनकी रिहाई के आदेश पारित किए गए।
Delhi riots accused Gulfisha Fatima released from jail
दिल्ली दंगों की आरोपी गुलफिशा फातिमा रिहा
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Gulfisha Fatima News: दिल्ली दंगों से जुड़े कथित साज़िश मामले में चार आरोपी बुधवार को जेल से रिहा हो गए। इन सभी को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिली थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कड़कड़डुमा कोर्ट के एडिशनल सेशन्स जज समीर बाजपेयी ने गुलफ़िशा फ़ातिमा, मीरान हैदर, शिफ़ा उर रहमान और मोहम्मद सलीम ख़ान द्वारा दाख़िल किए गए दो-दो लाख रुपये के ज़मानती बॉन्ड और समान राशि के दो स्थानीय ज़मानतदारों को स्वीकार करते हुए उनकी रिहाई के निर्देश दिए।

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पांचवें अभियुक्त शादाब अहमद अदालत में ज़मानती बॉन्ड जमा कराने के लिए पेश नहीं हुए, जिस कारण उनकी रिहाई नहीं हो सकी। हालांकि शादाब अहमद भी उन आरोपियों में शामिल हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ज़मानत दी थी।

जेल से बाहर आए दिल्ली दंगों के आरोपी

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि अन्य अभियुक्तों की तुलना में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की भूमिका अलग और अधिक गंभीर है। जेल प्रशासन के मुताबिक़, गुलफ़िशा फ़ातिमा, शिफ़ा उर रहमान और मीरान हैदर को बुधवार रात तिहाड़ जेल से रिहा किया गया, जबकि मोहम्मद सलीम ख़ान मंडोली जेल से बाहर आए।

फूलों की मालाओं से किया गया स्वागत

जेल से बाहर आने पर गुलफ़िशा फ़ातिमा का उनके परिजनों ने फूलों की मालाओं और मिठाइयों के साथ स्वागत किया। रिहाई के बाद शिफ़ा उर रहमान ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “मैं कोर्ट का आभार व्यक्त करती हूं। मुझे भारत के संविधान और क़ानून पर पूरा भरोसा था और आगे भी रहेगा। उसी भरोसे के तहत हम आज बाहर आए हैं।”

गौरतलब है कि उमर ख़ालिद और शरजील इमाम समेत सभी सात अभियुक्तों पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2019 में सीएए (नागरिकता संशोधन क़ानून) के विरोध प्रदर्शनों की आड़ में फ़रवरी 2020 में दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की साज़िश रची। अभियुक्तों की ओर से दलील दी गई थी कि वे पांच साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं, जबकि अब तक मामले का ट्रायल शुरू नहीं हो सका है।

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