
साइबर ठगी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Cyber Crime Report India 2026 Maharashtra: भारत में डिजिटल क्रांति के साथ-साथ साइबर अपराधों का ग्राफ भी बेहद डरावनी रफ्तार से बढ़ा है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह वर्षों में भारतीयों को विभिन्न ऑनलाइन धोखाधड़ी और जालसाजी के मामलों में 52,976 करोड़ से अधिक का भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। अकेले साल 2025 में ही लगभग 19,813 करोड़ की ठगी दर्ज की गई, जो डिजिटल सुरक्षा की खामियों और जालसाजों के बढ़ते हौसलों को दर्शाती है। यह आंकड़े न केवल आर्थिक नुकसान की कहानी कहते हैं, बल्कि देश के नागरिकों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करते हैं।
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2020 में यह नुकसान केवल 8.56 करोड़ था, जो 2025 तक आते-आते 19,813 करोड़ के पार पहुंच गया। साल 2024 में 22,849 करोड़ का उच्चतम नुकसान दर्ज किया गया था, जिससे पता चलता है कि पिछले दो साल सबसे खतरनाक रहे हैं। साइबर अपराधी अब “डिजिटल अरेस्ट” और “इन्वेस्टमेंट स्कैम” जैसे नए हथकंडों का इस्तेमाल कर लोगों की जमा पूंजी लूट रहे हैं।
राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र इस सूची में शीर्ष पर है, जहां पिछले साल 3,203 करोड़ का नुकसान हुआ और 2.8 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। इसके बाद कर्नाटक 2,413 करोड़ और तमिलनाडु 1,897 करोड़ के नुकसान के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। उत्तर प्रदेश और तेलंगाना भी शीर्ष पांच प्रभावित राज्यों में शामिल हैं, जो कुल राष्ट्रीय नुकसान के आधे से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुल ठगी का 77% हिस्सा फर्जी निवेश योजनाओं के नाम पर लूटा गया है, जहां लोगों को भारी मुनाफे का लालच दिया जाता है। इसके अलावा 8% नुकसान ‘डिजिटल अरेस्ट’ के माध्यम से हुआ, जिसमें अपराधी पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं। क्रेडिट कार्ड फ्रॉड (7%), सेक्सटॉर्शन (4%) और ई-कॉमर्स धोखाधड़ी (3%) भी ठगी के प्रमुख कारण बनकर उभरे हैं, जो आधुनिक समाज के लिए एक बड़ी चुनौती हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि 45% साइबर अपराध दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे कंबोडिया और म्यांमार से संचालित हो रहे हैं, जिससे इनसे निपटना और भी मुश्किल हो गया है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अनजान लिंक पर क्लिक न करें और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज की रिपोर्ट तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर करें। केवल सतर्कता और तकनीक का सही ज्ञान ही आपको इस डिजिटल जालसाजी से सुरक्षित रख सकता है।






