
टर्न ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार 52% भारतीय युवा विदेश जाना चाहते हैं (सोर्स-सोशल मीडिया)
Indian Youth Migration Survey Report 2026: ग्लोबल टैलेंट प्लेटफॉर्म टर्न ग्रुप की हालिया रिपोर्ट ने देश के युवाओं की सोच को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। सर्वे के अनुसार देश के आधे से ज्यादा यानी 52 प्रतिशत युवा बेहतर करियर और अधिक पैसा कमाने की चाहत में विदेश जाना चाहते हैं। यह रिपोर्ट देशभर के करीब 8,000 लोगों से की गई बातचीत पर आधारित है जो भारतीय टैलेंट के ग्लोबल रुझान को दर्शाती है। आर्थिक प्रगति की यह भूख युवाओं को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार अवसरों को तलाशने के लिए प्रेरित कर रही है।
सर्वेक्षण के परिणामों से पता चलता है कि माइग्रेशन का सबसे प्रमुख कारण वित्तीय विकास है जिसे 46 फीसदी लोगों ने अपनी मुख्य प्रेरणा बताया है। इसके बाद 34 फीसदी युवाओं ने करियर ग्रोथ को प्राथमिकता दी है जबकि ग्लोबल एक्सपोजर और व्यक्तिगत सपने अन्य कारणों में शामिल हैं। यह स्पष्ट है कि मौजूदा दौर में विदेश जाने की लहर केवल लाइफस्टाइल बदलने के लिए नहीं बल्कि ठोस आर्थिक नतीजों के लिए है।
पसंदीदा देशों की सूची में एक बड़ा बदलाव देखा गया है जहां अब जर्मनी 43 फीसदी लोगों के साथ सबसे पसंदीदा जगह बनकर उभरा है। इसके बाद यूनाइटेड किंगडम को 17 फीसदी और जापान को 9 फीसदी लोग अपनी अगली मंजिल के रूप में देख रहे हैं। पारंपरिक रूप से पहली पसंद रहने वाला अमेरिका अब केवल 4 फीसदी युवाओं की पसंद रह गया है जो ग्लोबल डिमांड के बदलते रुख को दिखाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक नर्सों के माइग्रेशन में एक मजबूत क्षेत्रीय एकाग्रता देखी गई है जहां विदेश जाने वाली 61 फीसदी नर्सें बड़े शहरों के बाहर से हैं। दिल्ली NCR क्षेत्र से 17 फीसदी नर्सें माइग्रेट करती हैं जबकि दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत का योगदान भी इसमें काफी महत्वपूर्ण रहा है। यह टियर 2 और टियर 3 शहरों के टैलेंट की वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों में बढ़ती मांग और पहुंच को प्रदर्शित करता है।
यह भी पढ़ें: ट्रंप के टैरिफ भी पड़े फीके! भारत की रफ्तार देख दुनिया हैरान, GDP अनुमान 6.5% से उछलकर 7.4% पहुंचा
विदेश जाने की मजबूत इच्छा के बावजूद भाषा की जरूरतें 44 फीसदी युवाओं के लिए आज भी सबसे बड़ी चुनौती और बाधा बनी हुई हैं। करीब 48 फीसदी लोगों ने अनैतिक रिक्रूटमेंट तरीकों और धोखाधड़ी का अनुभव साझा किया है जो अंतरराष्ट्रीय प्लेसमेंट की प्रक्रिया को जटिल बना देता है। इसके अलावा मार्गदर्शन की कमी और माइग्रेशन की उच्च लागत भी युवाओं के सपनों के आड़े आ रही है।






