वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, फोटो- सोशल मीडिया
India Defence Allocation Budget 2026: पाकिस्तान के साथ हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और वैश्विक युद्धों के बीच, केंद्र सरकार ने भारत की सैन्य शक्ति को नया आयाम देने के लिए रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है। वित्त मंत्री ने इस बार रक्षा आवंटन को जीडीपी का 11 प्रतिशत कर दिया है, जो सीधे तौर पर सेना के आधुनिकीकरण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को समर्पित है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रविवार को पेश किए गए बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए ₹7.85 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष (2025-26) के ₹6.81 लाख करोड़ के मुकाबले लगभग 14-15 प्रतिशत की बड़ी छलांग है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुल रक्षा बजट अब भारत की जीडीपी का 11 प्रतिशत हो गया है, जो पिछले साल केवल 8 प्रतिशत था। यह वृद्धि दर्शाती है कि सरकार सीमा पर बढ़ते खतरों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करना चाहती।
सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करने के लिए ‘कैपिटल आउटले’ (Capital Outlay) के तहत ₹2.19 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं। यह पिछले साल के ₹1.8 लाख करोड़ के मुकाबले 21.84 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी है। इस भारी-भरकम राशि का उपयोग पाइपलाइन में मौजूद बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:
• राफेल फाइटर जेट: नौसेना के लिए अतिरिक्त राफेल-एम (Rafale-M) सौदे को तेजी मिलेगी।
• प्रोजेक्ट 75I: इसके तहत 6 नई स्टील्थ पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा, जो एआईपी (AIP) तकनीक से लैस होंगी।
• UAV और ड्रोन: अमेरिका से MQ-9B जैसे हाई-एल्टीट्यूड ड्रोन और स्वदेशी काउंटर-ड्रोन सिस्टम की खरीद पर ध्यान दिया जाएगा।
• एयरो इंजन: विमानों और एयरो इंजन के लिए ₹63,733 करोड़ अलग से रखे गए हैं।
रक्षा बजट में यह रिकॉर्ड वृद्धि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आई है, जिसे 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान के साथ पहला बड़ा सैन्य टकराव माना जा रहा है। सीमा पर बढ़ते आतंकी खतरों और चीन-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ती चुनौतियों ने सरकार को अपनी सैन्य क्षमता तेजी से बढ़ाने के लिए मजबूर किया है। सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने बजट से पहले 20 प्रतिशत की वृद्धि की मांग की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
बजट में ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा उत्पादन और निर्यात को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार ने वर्ष 2029 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है। घरेलू उत्पादन को सस्ता बनाने के लिए वित्त मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) के लिए आयातित कच्चे माल पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को खत्म करने का प्रस्ताव दिया है। इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि भारत वैश्विक स्तर पर रक्षा विनिर्माण का केंद्र बन सकेगा।
Union Budget Live | Defence Budget Strengthens National Security! India’s defence allocation rises sharply from Rs 2.53 lakh crore (2013-14) to Rs 7.84 lakh crore (2026-27) an increase of 209%+, strengthening national security and boosting indigenous defence capability.… pic.twitter.com/0cBWxcFhvM — MyGovIndia (@mygovindia) February 1, 2026
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सेना के दैनिक कार्यों और परिचालन खर्चों में भी 17.24 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो ईंधन, गोला-बारूद और रखरखाव के लिए आवश्यक है। इसके अलावा, रक्षा पेंशन के लिए ₹1.71 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पिछले साल की तुलना में 6.53 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, एविएशन फ्यूल की बढ़ती कीमतें भारतीय वायुसेना के लिए एक चिंता का विषय बनी हुई हैं, जिससे निपटने के लिए सरकार बायो-फ्यूल और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के उपयोग पर ध्यान दे रही है।
Ans: बजट 2026 में रक्षा मंत्रालय के लिए कुल ₹7.85 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है।
Ans: 2025-26 के ₹6.81 लाख करोड़ के मुकाबले यह लगभग 14-15% की वृद्धि है।
Ans: रक्षा बजट अब भारत की GDP का 11% हो गया है, जो पिछले साल 8% था।
Ans: नौसेना के लिए Rafale-M फाइटर जेट | Project 75I के तहत 6 नई स्टील्थ पनडुब्बियां | MQ-9B ड्रोन और स्वदेशी काउंटर-ड्रोन सिस्टम | एयरो इंजन विकास
Ans: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सीमा पर बढ़ते खतरों के चलते रक्षा बजट में यह रिकॉर्ड बढ़ोतरी की गई है।
Ans: रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए MRO (मरम्मत-ओवरहाल) हेतु आयातित कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया है।
Ans: विमानों और एयरो इंजन के लिए ₹63,733 करोड़ का प्रावधान किया गया है।