EPFO ने दूर किया प्राइवेट कर्मचारियों का बड़ा डर… अब नौकरी बदलने पर नहीं रुकेगा 7 लाख का बीमा क्लेम

EDLI Scheme Rules: EPFO ने EDLI बीमा योजना के नियमों में बड़ी राहत दी है। अब नौकरी बदलने पर वीकेंड या सरकारी छुट्टियों को सर्विस में ब्रेक नहीं माना जाएगा, जिससे परिवार को डेथ क्लेम आसानी से मिलेगा।
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EDLI Scheme Rules: EPFO ने EDLI बीमा योजना के नियमों में दी बड़ी राहत (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Continuous Service Definition EPFO: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने एक बड़ी राहत भरी खबर साझा की है। अक्सर नौकरी बदलते समय बीच में आने वाली छुट्टियों के कारण बीमा क्लेम रिजेक्ट हो जाते थे, लेकिन अब EPFO ने इस कन्फ्यूजन को खत्म कर दिया है। संगठन ने कर्मचारी डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) स्कीम के तहत 'लगातार सर्विस' के नियमों पर नई स्पष्टता जारी की है। इस बदलाव का सीधा फायदा उन परिवारों को मिलेगा जो किसी अनहोनी की स्थिति में बीमा राशि के हकदार होते हैं।

नौकरी बदलने के बीच छुट्टियां अब बाधा नहीं

EPFO द्वारा जारी नए सर्कुलर के अनुसार, अगर कोई कर्मचारी एक कंपनी छोड़कर दूसरी कंपनी जॉइन करता है और इस दौरान शनिवार, रविवार या कोई सरकारी छुट्टी आती है, तो इसे सेवा में 'ब्रेक' नहीं गिना जाएगा। उदाहरण के लिए, अगर आपने शुक्रवार को इस्तीफा दिया और सोमवार को नई नौकरी जॉइन की, तो बीच के दो दिनों को लगातार सर्विस का हिस्सा माना जाएगा। पहले कई मामलों में इन छोटी छुट्टियों को ब्रेक मानकर डेथ क्लेम रिजेक्ट कर दिए जाते थे, जिससे मृतक के परिवार को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता था।

EDLI स्कीम और न्यूनतम बीमा राशि में बढ़ोत्तरी

EDLI योजना का मुख्य उद्देश्य कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। EPFO ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी सदस्य ने मौत से पहले लगातार 12 महीने काम नहीं भी किया था और उसका पीएफ बैलेंस 50,000 रुपये से कम था, तब भी उसके कानूनी वारिस को कम से कम 50,000 रुपये का न्यूनतम क्लेम जरूर मिलेगा। वहीं अधिकतम क्लेम राशि 7 लाख रुपये तक हो सकती है। यह राशि नॉमिनी के बैंक खाते में सीधे जमा की जाती है।

कई कंपनियों में काम करने वालों को मिली राहत

EPFO ने यह भी साफ किया है कि अगर किसी सदस्य ने पिछले एक साल में अलग-अलग ऐसी कंपनियों में काम किया है जो PF के दायरे में आती हैं, तो उसे 'लगातार सर्विस' ही माना जाएगा। यहां तक कि दो नौकरियों के बीच 60 दिनों तक का गैप होने पर भी बीमा लाभ पर असर नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही, अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु नौकरी के दौरान होती है और उसका पिछला PF योगदान 6 महीने के भीतर जमा हुआ है, तो उसका परिवार क्लेम के लिए पूरी तरह पात्र होगा।

EES-2025: पीएफ से छूटे कर्मचारियों के लिए सुनहरा मौका

बीमा नियमों के अलावा, सरकार ने 'एम्प्लॉइज एनरोलमेंट स्कीम (EES)-2025' की घोषणा भी की है। यह योजना नवंबर 2025 से शुरू होकर 6 महीने तक चलेगी। इसके तहत उन कर्मचारियों को पीएफ कवरेज से जोड़ा जा सकेगा जो जुलाई 2017 से अक्टूबर 2025 के बीच काम कर रहे थे लेकिन किन्हीं कारणों से स्कीम से बाहर रह गए थे। कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे इस मोहलत का फायदा उठाकर अपने सभी योग्य कर्मचारियों का पंजीकरण सुनिश्चित करें ताकि उन्हें भविष्य में सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सके।

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