आम आदमी को बड़ी राहत, जनवरी में सस्ती हुई खाने की थाली; शाकाहारी और मांसाहारी दोनों के घटे दाम

Food Prices Drop: क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में शाकाहारी थाली की कीमत में पिछले वर्ष की तुलना में एक प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि मांसाहारी थाली की कीमत में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
homemade food became cheaper in january 2026
शाकाहारी भोजन की थाली, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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CRISIL Rice Roti Rate Report Jan 2026: महंगाई के मोर्चे पर देश की आम जनता के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। जनवरी 2026 में सालाना आधार पर घर में बनी शाकाहारी थाली और मांसाहारी थाली की कीमत में गिरावट देखी गई है। इसकी वजह सब्जियों और दालों की कीमतों में कमी आना है। यह जानकारी मंगलवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई।

क्रिसिल इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में शाकाहारी थाली की कीमत में पिछले वर्ष की तुलना में एक प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि मांसाहारी थाली की कीमत में सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शाकाहारी थाली की कीमत में गिरावट का मुख्य कारण प्याज, आलू और दालों की कीमतों में आई भारी कमी थी।

टमाटर की कीमतों ने बिगाड़ा खेल

हालांकि, क्रिसिल के लेटेस्ट मासिक खाद्य लागत संकेतक के अनुसार, टमाटर की कीमतों में वृद्धि ने समग्र राहत को सीमित कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में टमाटर की कीमत 31 रुपए प्रति किलोग्राम थी, जो जनवरी 2026 में बढ़कर 46 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई, यानी इसमें वार्षिक आधार पर 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह वृद्धि इस महीने आवक में 39 प्रतिशत की कमी के कारण हुई, हालांकि यह वृद्धि पिछले वर्ष के कम आधार पर हुई। इसके विपरीत, प्याज की कीमतों में वार्षिक आधार पर 27 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसका कारण अधिक स्टॉक उपलब्धता और निर्यात में कमी थी। आलू की कीमतों में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है क्योंकि पिछली फसल में कम पैदावार के कारण कीमतें बढ़ गई थीं, जिससे उच्च आधार प्रभाव पैदा हुआ था।

इन कारणों से शाकाहारी थाली सस्ती

क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुष्पन शर्मा ने कहा कि प्याज, आलू और दालों की कीमतों में भारी गिरावट के कारण शाकाहारी थाली की लागत कम हो गई है। शर्मा ने बताया कि अधिक स्टॉक स्तर के कारण प्याज और दालों की कीमतों में नरमी आई, जबकि आलू की कीमतें उच्च आधार के कारण गिरीं। इसके विपरीत, टमाटर की कीमतें पिछले साल के निम्न आधार के कारण बढ़ीं। चालू वित्त वर्ष में स्टॉक में सुधार होने के कारण दालों की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत की गिरावट आई है।

बंगाल चना, पीली मटर और काली चना के आयात में वृद्धि से इस स्थिति को बल मिला। वित्त वर्ष 2025 में बंगाल चना का आयात वार्षिक आधार पर नौ गुना बढ़ गया, जबकि पीली मटर का आयात 85 प्रतिशत और काली चना का आयात 31 प्रतिशत बढ़ा। मामूली शुल्क लगाए जाने के बावजूद इन आयातों को मार्च 2026 तक जारी रखने की अनुमति दी गई। साथ ही, कुछ इनपुट लागतों में भी वृद्धि हुई।

तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी

सोयाबीन तेल की वैश्विक आपूर्ति में कमी के कारण वनस्पति तेल की कीमतों में वार्षिक आधार पर 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे घरेलू कीमतें भी बढ़ गईं।लपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी वार्षिक आधार पर 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे थाली की लागत में समग्र गिरावट सीमित रही

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