हजारों स्टार्टअप्स, विश्व में UPI का डंका; डिजिटल इंडिया ने बदली भारत की तस्वीर

प्रधानमंत्री ने आज से 10 साल पहले 1 जुलाई, 2015 को डिजिटल इंडिया मिशन की शुरुआत की थी। इन 10 सालों में डिजिटल इंडिया ने शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़ा बदलाव लाया है।
Digital India 10th Anniversary
प्रतीकात्मक तस्वीर
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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 1 जुलाई 2015 को "डिजिटल इंडिया" मिशन की शुरुआत की थी, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह अभियान दस वर्षों में भारत को टेक्नोलॉजी के सेक्टर में इतनी उंचाई तक ले जाएगा। आज जब हम डिजिटल इंडिया की 10वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, तो यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं बल्कि एक बड़ा जन-आंदोलन बन चुका है। यह एक ऐसी रिवोल्यूशन है जिसने शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक के लोगों के जीवन को आसान बना दिया है।

आज से 10 साल पहले जहां किसी सरकारी काम के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता था या दफ्तरों का चक्कर काटना पड़ता था, लेकिव अब वही काम लोग  अपने मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर की मदद से बिना किसी परेशानी घर बैठे कर पा रहे हैं। आधार कार्ड, डिजिलॉकर, ई-हॉस्पिटल, उमंग ऐप जैसी सर्विस अब देश के लोगों के लिए आम बात हो गई हैं। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी अपने मोबाइल से ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा की लाभ ले रही हैं और छात्र घर बैठे पढ़ाई कर पा रहे हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा डेटा यूजर्स बना भारत

2015 में भारत में इंटरनेट का उपयोग सीमित था, लेकिन आज गांव-गांव तक इंटरनेट पहुंच चुका है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा डेटा उपयोग करने वाला देश बन गया है। भारतनेट जैसी योजनाओं के तहत लाखों गांवों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया है। वहीं, कोविड-19 महामारी के दौरान डिजिटल शिक्षा और टेलीमेडिसिन की भूमिका सबसे ज्यादा देखने को मिली। स्कूलों की पढ़ाई ऑनलाइन हुई, डॉक्टरों की सलाह वीडियो कॉल पर मिली। डिजिटल इंडिया की मजबूत नींव के कारण ही यह सब कुछ संभव हो सका।

UPI ने भारत को ग्लोबल लीडर बनाया

डिजिटल इंडिया ने युवाओं को नई दिशा दी है। फ्रीलांसिंग, डिजिटल मार्केटिंग, ऐप डेवलपमेंट जैसे नए क्षेत्र खुले हैं। इसके साथ ही सरकार की स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी योजनाओं ने इसे और बल दिया है। पिछले 10 वर्षों में हजारों स्टार्टअप्स ने जन्म लिया, जो अब दुनिया में भारत की पहचान बना रहे हैं। आज से 10 साल पहले अधिकतर लोग नकद लेन-देन करते थे। लेकिन अब QR कोड स्कैन करना या UPI से भुगतान करना आम बात है। सड़क किनारे चाय वाले से लेकर मॉल तक हर जगह डिजिटल पेमेंट का चलन है। UPI ने भारत को ग्लोबल लीडर बना दिया है।

डिजिटल इंडिया के सामने कई चुनौतियां

हालांकि डिजिटल इंडिया ने बहुत तरक्की की है, लेकिन इसके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। आज भी कुछ गांवों में नेटवर्क की समस्या है, कुछ लोग डिजिटल साक्षरता से वंचित हैं। साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता भी अहम मुद्दे हैं जिन पर आगे और ध्यान देना जरूरी है। डिजिटल इंडिया सिर्फ तकनीक का विस्तार नहीं है, यह एक ऐसा बदलाव है जिसने भारत के आम नागरिक की सोच और जीवनशैली को बदला है। अब एक किसान भी मोबाइल से फसल का बाजार भाव देख सकता है, एक छात्र ऑनलाइन कोर्स करके नौकरी पा सकता है और एक महिला अपने घर से ऑनलाइन कारोबार चला सकती है।

10 सालों में डिजिटल इंडिया ने जो नींव रखी है, वह आने वाले वर्षों में भारत को एक आत्मनिर्भर, समावेशी और तकनीकी रूप से सशक्त राष्ट्र की ओर ले जाएगी। यह सिर्फ तकनीकी विकास नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव की एक सशक्त मिसाल है।

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