
ज्वाइंट टैक्स फाइलिंग (सौ. डिजाइन फोटो )
Joint Taxation For Married Couples: बजट का मौसम एक बार फिर आ चुका है और देश के करोड़ों करदाताओं की निगाहें 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले आम बजट पर टिकी हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस बजट से बड़ी टैक्स राहत की उम्मीद कम है, क्योंकि पिछले साल ही सरकार 12 से 15 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री कर चुकी है।
इस बार चर्चा टैक्स स्लैब में बदलाव की नहीं, बल्कि टैक्स भरने की पूरी व्यवस्था में बड़े सुधार की है। खबरों के मुताबिक, सरकार टैक्सेशन पॉलिसी में ऐसा बदलाव कर सकती है, जो सीधे तौर पर शादीशुदा जोड़ों और सिंगल इनकम परिवारों को प्रभावित करेगा।
सबसे अहम प्रस्ताव ‘ज्वाइंट टैक्सेशन पॉलिसी’ को लेकर सामने आ रहा है। मौजूदा व्यवस्था में पति और पत्नी को अपनी-अपनी आय पर अलग-अलग इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना होता है। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत दंपत्ति को संयुक्त रूप से ITR दाखिल करने का विकल्प मिल सकता है।
अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में ज्वाइंट टैक्सेशन सिस्टम पहले से मौजूद है। वहां पति-पत्नी अपनी संयुक्त आय पर टैक्स भर सकते हैं। अगर भारत में भी यह व्यवस्था लागू होती है, तो टैक्स प्लानिंग आसान होने के साथ-साथ कागजी प्रक्रिया भी कम हो जाएगी।
इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा उन परिवारों को मिलेगा, जहां कमाई का जरिया सिर्फ एक सदस्य है। मौजूदा नियमों में दूसरे पार्टनर की टैक्स छूट सीमा बेकार चली जाती है। ज्वाइंट टैक्सेशन से परिवार कुल आय पर टैक्स का आकलन कर सकेगा, जिससे टैक्स बोझ कम होगा और अच्छी-खासी बचत संभव होगी।
सरकार ओल्ड टैक्स रिजीम को अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खत्म करने पर भी विचार कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 72 फीसदी करदाता पहले ही न्यू टैक्स रिजीम चुन चुके हैं।
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ओल्ड टैक्स रिजीम हटाने से होने वाली नाराजगी को कम करने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने की योजना पर चर्चा है। माना जा रहा है कि नौकरीपेशा लोगों के लिए यह सीमा 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये की जा सकती है।






