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पिता की मौत के बाद छुटी पढ़ाई, भारत लौट IT सेक्टर का सम्राट बन गए अजिम प्रेमजी
Azim Premji Birthday: अजिम प्रेमजी का एक सपना था कि वह स्टैनफोर्ड से ग्रेजुएशन के बाद वर्ल्ड बैंक के साथ करियर की शुरुआत करें। हालांकि, अचानक पिता की मौत के बाद उन्हें पढ़ाई छोड़कर भारत लौटना पड़ा।
- Written By: मनोज आर्या

(कॉन्सेप्ट फोटो, नवभारत लाइव डॉट कॉम)
Azim Premji Birth Anniversary: भारतीय बिजनेसमैन और विप्रो लिमिटेड के फाउंडिंग चेयरमैन अजिम प्रेमीजी का जन्म (24 जुलाई, 1945) को हुआ था। आज वह अपना 80वां जन्मदिन मना रहे हैं। बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि उनका पूरा नाम अजिम हशिम प्रेमजी है। लोग उन्हें भारतीय आईटी सेक्टर के सम्राट के रूप में भी जानते हैं। वे चार दशकों से देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक विप्रो को अलग-अलग प्रयोग और अपनी गाइडेंस की बदौलत आगे बढ़ा रहे हैं। यही कारण है कि यह कंपनी आज सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की ग्लोबल लीडर बनकर उभरी है।
साल 2010 में उन्हें एशियावीक ने दुनिया के 20 सबसे पावरफुल पुरुषों में चुना था। इसके अलावा टाइम मैग्जीन द्वारा दो बार 2004 और 2011 में 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में शामिल किया गया था। वहीं, कई सालों से लगातार उन्हें 500 सबसे प्रभावशाली मुसलमानों में से एक लिस्ट किया गया है। वे अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु के चांसलर के पद पर हैं। प्रेमजी को भारत सरकार ने देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित कर चुकी है।
पिता की मौत के बाद पढ़ाई छोड़ लौटे भारत
अजिम प्रेमजी ने कभी सपना देखा धा कि वह स्टैनफोर्ड से ग्रेजुएशन करने के बाद वह वर्ल्ड बैंक के साथ अपनी करियर की शुरुआत करेंगे, हालांकि, अचानक पिता मोहम्मद हुसैन हशम प्रेमजी के निधन के कारण पढ़ाई छोड़ उन्हें भारत लौटनना पड़ा। इसके बाद वह मजबूरी में अपने पारिवारिक कारोबार की कमान संभाले। साल 1968 में वह विप्रो के एमडी के रूप में कार्यभार संभाला और 2019 में चेयरमैन पद से रिटायरमेंट होने तक कंपनी का नेतृत्व किया।
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(राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल, 1 अप्रैल, 2011 को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में अजीम प्रेमजी को पद्म विभूषण पुरस्कार प्रदान करती हुई।)
अजिम प्रेमजी ने ईमादारी को सबसे ऊपर रखा
एक तरफ जहां अरबपतियों में हर समय पूंजी बनाने की होड़ लगी रहती है वहीं, दूसरी ओर प्रेमजी ने ईमानदारी को सबसे ऊपर रखा। उनके जीवन में यह सबसे मूल्यवान रहा, जो उन्होंने अपने पिता से सीखा था और उदाहरण पेश करके नेतृत्व करने में दृढ़ विश्वास रखते थे। विप्रो के मुंबई कार्यालय में वह अक्सर लिफ्ट लेने के बजाय चौदह मंजिलें पैदल चढ़ना पसंद करते थे। यह आदत स्टैनफोर्ड में उनके कार्यकाल के दौरान बनी थी। प्रेमजी के लिए, सीढ़ियां चढ़ना हार्वर्ड स्टेप टेस्ट का उनका अपना तरीका बन गया।
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भारत के सबसे बड़े दानवीर
वहीं, साल 2019 में अजीम प्रेमजी ने विप्रो के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया। उनके बेटे रिशद प्रेमजी ने अब उनकी गह ली है। जानकारी के मुताबिक, वर्तमान समय में विप्रो का कारोबार 100 से ज्यादा देशों में फैला हुआ है। इसके अलावा अजीम प्रेमजी का नाम देश के बड़े दानवीर लोगों में भी आता है। अब तक वह करीब 15 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि दान कर चुके हैं।
Azim premji 80th birth anniversary know how the became czar of indian software industry
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