महंगाई में तेज गिरावट, ब्याज दरों में फिर हो सकती है कटौती; SBI रिसर्च का दावा

खुदरा महंगाई, जिसे आम लोग काफी आसानी से महसूस कर सकते हैं, वह मई में घटकर 2.82 प्रतिशत रह गई। यह अप्रैल (3.16 प्रतिशत) से भी कम है। यह लगातार चौथा महीना है जब खुदरा महंगाई दर RBI के लक्ष्य 4 प्रतिशत से नीचे है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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नई दिल्ली: देश की आम जनता के लिए एक और खुशखबरी आने वाली है। पिछले महीने (मई 2025) में खुदरा महंगाई में बड़ी गिरावट देखी गई। खाने-पीने के चीजों के दाम कम हुए हैं। खासतौर पर सब्जियों और दालों के दाम काफी हद तक नीचे आए हैं। सब्जियां पिछले महीने करीब 14 प्रतिशत और दालें करीब 8 प्रतिशत सस्ती हुईं। मांस-मछली और मसालों के कीमतों में भी कुछ गिरावट देखी गई है। लेकिन, फल, ब्यूटी प्रोडक्ट और खाने के तेलों के कीमतों में अभी भी उछाल देखी जा रही है। खाने के तेल पिछले तीन साल से ज्यादा समय में सबसे महंगे हैं।

खुदरा महंगाई, जिसे आम लोग काफी आसानी से महसूस कर सकते हैं, वह मई में घटकर 2.82 प्रतिशत रह गई। यह अप्रैल (3.16 प्रतिशत) से भी कम है। यह लगातार चौथा महीना है जब खुदरा महंगाई दर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लक्ष्य 4 प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। पिछले पांच सालों में यह महंगाई सबसे बड़ी गिरावट है। यह आंकड़े आरबीआई के लिए अच्छी खबरा हैं, क्यों सरकार उसे खुदरा महंगाई को 4 फीसदी के आसपास रखने का काम सौंपा है।

ब्याज दरों में कटौती कर सकता है RBI

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की रिसर्च टीम ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि अगर महंगाई इसी तरह काबू में रही, तो अगले साल जुलाई 2025 तक यह 2 प्रतिशत या उससे नीचे जा सकती है। एसबीआई रिसर्च का मानना है कि RBI अगस्त महीने में होने वाली अपनी अगली बैठक में ब्याज दरों में एक और कटौती कर सकता है। पहले ही इसी साल जून में आरबीआई ने ब्याज दरों में आधा प्रतिशत (0.50 प्रतिशत) की बड़ी कटौती की थी। हालांकि, वेशेषज्ञों ने तो केवल 0.25 प्रतिशत की उम्मीद थी। फरवरी से लेकर अब तक कुल 1 फीसदी की कटौती हो चुकी है। ऐसे में अब अनुमान यह लगाया जा रहा है कि RBI अगस्त में भी एक कटौती कर सकता है।

आम लोगों के लिए यह कितना फायदेमंद?

अगर भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दर में कटौती कर दीं, तो इसका सीधा लाभ हम जैसे कर्ज लेने वालों को मिलेगा। होम लोन (घर का कर्ज), कार लोन, पर्सनल लोन जैसे सभी तरह के कर्ज की मासिक किस्त (EMI) कम हो सकती है। इससे लोगों के पास पैसे बचेंगे, वे ज्यादा खर्च कर सकेंगे या इंवेस्ट कर सकेंगे। जिससे देश की अर्थव्यवस्ता को मदद मिलेगी और वह मजबूती से आगे बढ़ेगा।

जून में आधा फीसदी की कटौती करते हुए, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कहा था कि साल के अंत में खुदरा महंगाई 4 फीसदी से नीचे रहने का अनुमान है, लेकन जल्द फिर से रेट कटौती की गुंजाइश कम है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया था कि भविष्य में क्या करेंगे, यह नए आकंड़ों पर निर्भर करेगा। मई के अच्छे महंगाई आंकड़ों ने अब एक नई उम्मीद जगा दी है।

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