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8th Pay Commission: क्या सच में ₹18,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹69,000 हो जाएगी? समझिए क्या है इस दावे का पूरा सच
- Written By: मनोज आर्या
8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू है। दावा किया जा रहा है कि नए वेतन आयोग में बेसिक सैलरी 18,000 से बढ़कर 69,000 हो जाएगी। लेकिन सच क्या है?

आठवां वेतन आयोग, (सोर्स- सोशल मीडिया)
8th Pay Commission Latest Update: आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चा चरम पर है, क्योंकि जल्द ही इस पर फैसला होने की संभावना है। सबसे बड़ी चर्चा इस दावे को केल कर है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 69,000 रुपये हो सकती है। लगभग 1.2 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए (लगभग 50 लाख कार्यरत कर्मचारी और करीब 70 लाख पेंशनभोगी) को उम्मीद है कि नए वेतन आयोग में उनके लिए कुछ बड़ा ऐलान किया जा सकता है। लेकिन क्या ऐसी बढ़ोतरी सच में संभव है? इसका जवाब सिर्फ ‘हां या ना’ से कहीं ज्यादा मुश्किल है।
न्यूनतम बेसिक सैलरी का यह आंकड़ा कर्मचारी यूनियनों की एक खास मांग से निकला है। यह आठवां वेतन आयोग का कोई ऑफिशियल प्रपोजल नहीं है, और न ही सरकार ने ऐसा कोई संकेत दिया है कि वह इसे मानने को तैयार है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आखिरी सिफारिश शायद ज्यादा सोच-समझकर की जाएगी, जिसमें कर्मचारियों की उम्मीदों और सरकार की वित्तीय क्षमता के बीच बैलेंस बनाया जाएगा।
बेसिक सैलरी ₹69,000 करने की चर्चा क्यों?
इस बहस के केंद्र में एक नंबर है- फिटमेंट फैक्टर। यह एक मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल नए वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी को बदलने के लिए किया जाता है। यह वह आधार बनाता है जिस पर सैलरी, पेंशन और कई अलाउंस को फिर से कैलकुलेट किया जाता है। सातवें वेतन आयोग के तहत, फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था, जिससे छठवां वेतन आयोग के तहत मिनिमम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर जनवरी 2016 से 18,000 रुपये हो गई।
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इस बार, नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करती है, ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। अगर इसे मान लिया जाता है, तो मिनिमम बेसिक पे 69,000 तक बढ़ सकती है।हालांकि, यह सिर्फ एक तरफ की बात है।
एक्सपर्ट्स को बढ़ोतरी की उम्मीद क्यों नहीं?
ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि 3.83 के करीब फिटमेंट फैक्टर से केंद्र पर और आखिरकार, कई राज्य सरकारों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा, जो अक्सर केंद्र के बाद अपने पे स्ट्रक्चर में बदलाव करती हैं। इसके बजाय, कई एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि फिटमेंट फैक्टर 2.0 और 2.1 के बीच कहीं सेटल होगा, जबकि दूसरों को लगता है कि अगर फाइनेंशियल हालात ठीक रहे तो यह अभी के 2.57 के करीब रह सकता है। लेकिन, 1.83 का फिटमेंट फैक्टर भी सैलरी और पेंशन में अच्छी बढ़ोतरी देगा।हालांकि, यह 69,000 रुपये के आंकड़े के आस-पास भी नहीं होगा। आसान भाषा में समझें, तो 69,000 रुपये वह अधिकतम मांग है जिस पर बात हो रही है।
बेसिक सैलरी के अलावा भी बहुत कुछ
कई एम्प्लॉई सिर्फ रिवाइज्ड बेसिक सैलरी पर फोकस करते हैं। लेकिन पे कमीशन इससे कहीं ज्यादा तय करता है। हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA), पेंशन, ग्रेच्युटी और कई रिटायरमेंट बेनिफिट्स सभी रिवाइज्ड बेसिक पे से जुड़े हैं। बेसिक में कोई भी बढ़ोतरी ऑटोमैटिकली इन कॉम्पोनेंट्स पर भी असर डालती है।इसलिए फाइनल टेक-होम सैलरी काफी बढ़ सकती है, भले ही फिटमेंट फैक्टर एम्प्लॉई यूनियनों की मांग से कम रहे।
बेसिक पे से ज्यादा HRA पर असर
आयोग के सबसे अहम प्रस्तावों में से एक HRA कैलकुलेट करने के तरीके से जुड़ा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा फ्रेमवर्क मॉडर्न फैमिली स्ट्रक्चर या बढ़ते शहरी लिविंग कॉस्ट को ठीक से नहीं दिखाता है। HRA के तरीके, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और बड़े परिवारों को मान्यता देने से लेवल-1 कर्मचारी की कुल सैलरी 65 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, भले ही सबसे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग न की गई हो।
7वें पे कमीशन का पे मैट्रिक्स बना रह सकता है
एक और जरूरी बात जिस पर चर्चा हो रही है, वह यह है कि क्या सरकार को 7वें पे कमीशन द्वारा शुरू किए गए मौजूदा पे मैट्रिक्स को जारी रखना चाहिए। पे मैट्रिक्स ने पुराने ग्रेड पे सिस्टम की जगह ले ली और अलग-अलग सरकारी सेवाओं में सैलरी में बढ़ोतरी को आसान बना दिया। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फ्रेमवर्क काफी हद तक अच्छा काम कर रहा है और इसे पूरी तरह से बदलने के बजाय कुछ बदलावों के साथ बनाए रखा जा सकता है।स्ट्रक्चर को शुरू से रीडिजाइन करने के बजाय आठवां वेतन आयोग मौजूदा मैट्रिक्स के अंदर पे लेवल, अलाउंस और बढ़ोतरी को बदलने पर ध्यान दे सकता है।
कर्मचारियों की सैलरी कैसे तय करता है आयोग?
आम धारणा के उलट, आयोग केवल नई सैलरी की घोषणा नहीं करता है। यह पहले मंत्रालयों, विभागों, कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगियों के संगठनों और विषय के जानकारों से राय लेता है। आयोग के सरकार के लिए अपनी सिफारिशें तैयार करने से पहले अलग-अलग शहरों में बैठक कर कर्मचारियों और उनके संगठनों से सुझाव ले रहा है।
यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission: क्या कोविड में रोके गए 18 महीने का बकाया DA देगी सरकार? 8वें वेतन आयोग के बीच चर्चा तेज
8वां वेतन आयोग कब लागू होगा?
आठवें वेतन आयोग को जनवरी 2025 में नोटिफाई किया गया था और शुरू में इसके 1 जनवरी, 2026 से लागू होने की उम्मीद थी, लेकिन इसके तुरंत लागू होने की उम्मीद कम है। पिछले पे कमीशन को सरकार की मंजूरी और रोलआउट से पहले अपनी रिपोर्ट जमा करने में आम तौर पर दो से तीन साल लगते थे। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को अपनी पे स्लिप में रिवाइज्ड सैलरी दिखने से पहले ज़्यादा इंतज़ार करना पड़ सकता है। अगर इसे पिछली तारीख से लागू किया जाता है, तो योग्य कर्मचारियों को बीच के समय का एरियर मिल सकता है।
8th pay commission is govermnet employees basic salary incresed by rs 690000
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