नीतीश कुमार, फोटो- सोशल मीडिया
Nitish Kumar Resignation: बिहार की सियासत में सोमवार का सूरज एक बड़े बदलाव की आहट लेकर आया है। दशकों तक बिहार की राजनीति के धुरी रहे नीतीश कुमार अब पटना से दिल्ली की ओर रुख कर रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को विधान परिषद की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
दरअसल, वे 16 मार्च को ही राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए थे और 10 अप्रैल से उनका कार्यकाल शुरू होने वाला है। जैसे ही नीतीश ने इस्तीफा दिया, पूरे सूबे में एक ही चर्चा आम हो गई है- अब बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? यह सवाल केवल राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार का हर नागरिक अब अपने भविष्य और नई सरकार की नीतियों को लेकर उत्सुक है।
बिहार में इस बार पहली बार भाजपा का अपना मुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। इस रेस में सबसे पहला और मजबूत नाम सम्राट चौधरी का उभरकर सामने आ रहा है। वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा विधायक दल के नेता सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज के एक बड़े चेहरे माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें सीएम बनाकर भाजपा एक बड़ा ‘जाति कार्ड’ खेल सकती है।
चूंकि बिहार में यादव और कुर्मी समुदाय से मुख्यमंत्री रह चुके हैं, ऐसे में 4.27 प्रतिशत से अधिक आबादी वाले कुशवाहा समुदाय को साधने के लिए सम्राट चौधरी सबसे उपयुक्त चेहरा हो सकते हैं। इसका असर न केवल बिहार, बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है, जहाँ इस बिरादरी की अच्छी-खासी संख्या है।
इस सियासी उथल-पुथल के बीच एक नया और चौंकाने वाला नाम निशांत कुमार का भी उछला है। नीतीश कुमार के पुत्र निशांत को हाल ही में सक्रिय राजनीति में उतारा गया है। चर्चा है कि नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद निशांत ही बिहार में जदयू के कुनबे को संभालेंगे। युवा चेहरा होने के साथ-साथ कुर्मी समुदाय से होना उनके पक्ष में जाता है।
हालांकि, सवाल यह है कि क्या भाजपा उन्हें सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपने के लिए तैयार होगी या उन्हें कैबिनेट में कोई अहम भूमिका दी जाएगी? इसके अलावा, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के विधायक पद से इस्तीफे ने भी चर्चाओं के बाजार को गर्म कर दिया है कि क्या वे भी किसी बड़ी जिम्मेदारी की रेस में शामिल हैं।
मुख्यमंत्री की दौड़ में एक और बड़ा नाम केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय का है। उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बेहद करीबी माना जाता है और उनकी बिहार की राजनीति पर गहरी पकड़ है। नित्यानंद राय यादव समुदाय से आते हैं, जो पारंपरिक रूप से राजद का कोर वोटर माना जाता रहा है। भाजपा नेतृत्व यह सोच सकता है कि यदि नित्यानंद राय को कमान सौंपी जाती है, तो विपक्ष के मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाना आसान होगा। एनडीए के घटक दल भी किसी ‘पिछड़े चेहरे’ को ही मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में नजर आ रहे हैं। ऐसे में नित्यानंद राय का अनुभव और समीकरणों को साधने की उनकी कला उन्हें इस रेस में काफी आगे खड़ा करती है।
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भाजपा अक्सर अपने फैसलों से लोगों को चौंकाने के लिए जानी जाती है। जैसे मध्य प्रदेश में अचानक मोहन यादव का नाम सामने आया था, वैसे ही बिहार में भी किसी ‘डार्क हॉर्स’ की एंट्री से इनकार नहीं किया जा सकता। जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक ये नाम केवल अटकलें ही हैं।