वेस्ट बंगाल चुनाव में ‘वेस्ट’ हो जाएगी कांग्रेस? अधीर की सीट नाक का सवाल; लिस्ट देख कैंडिडेट्स मचा रहे बवाल

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 284 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ते हुए दलित, आदिवासी और मुस्लिम समीकरणों पर भरोसा जताया है।
adhir ranjan choudhary
बंगाल में कांग्रेस ने काटा बवाल, फोटो सोशल मीडिया
Updated on

West Bengal Congress Candidate List: पश्चिम बंगाल की सियासत में रविवार का दिन एक बड़ी हलचल लेकर आया। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपनी रणनीति साफ करते हुए 284 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन की तमाम अटकलों को दरकिनार करते हुए पार्टी ने सभी 294 सीटों पर अकेले लड़ने का साहसी फैसला लिया है। इस बार ये चुनाव अधीर रंजन चौधरी के लिए नाक का सवाल होने वाला है।

इस लिस्ट के सार्वजनिक होते ही कहीं जीत के दावे सुनाई दे रहे हैं, तो कहीं अपनों के ही विरोध की आग भड़क उठी है। एक आम मतदाता के लिए यह चुनाव इसलिए खास है क्योंकि कांग्रेस अब अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

पुराने दिग्गजों पर भरोसा और जातीय समीकरणों का बड़ा दांव

कांग्रेस ने इस बार 'सोशल इंजीनियरिंग' को अपना मुख्य हथियार बनाया है। पार्टी ने अनुसूचित जाति के 68 और अनुसूचित जनजाति के 16 उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। इसके अलावा, मुस्लिम समुदाय से अब तक 67 चेहरों को टिकट दिया जा चुका है, जबकि यह संख्या 72 तक पहुंचना तय है। पार्टी ने 44 महिलाओं को भी उम्मीदवार बनाकर आधी आबादी को साधने की कोशिश की है। सबसे चर्चित नाम पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी का है, जिन्हें उनकी पुरानी कर्मभूमि बहरामपुर से प्रत्याशी बनाया गया है। 2024 की चुनावी हार के बाद अधीर के लिए यह साख बचाने की एक नई और बड़ी लड़ाई मानी जा रही है।

ममता के गढ़ में कांग्रेस की सीधी चुनौती और नए चेहरे

सिर्फ बहरामपुर ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में भी कांग्रेस ने प्रदीप प्रसाद को उतारकर कड़ा मुकाबला होने के संकेत दिए हैं। इसके साथ ही, टीएमसी से वापसी करने वाली मौसम बेनजीर नूर को मालदा के मालतीपुर से टिकट मिला है। दिवंगत दिग्गज नेता सोमेन मित्रा के बेटे रोहन मित्रा को दक्षिण कोलकाता की बालीगंज सीट से मौका दिया गया है। कांग्रेस का यह कदम साफ करता है कि वह अपने पुराने जमीनी आधार और अनुभवी चेहरों के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

मालदा दफ्तर में बवाल और अपनों का ही तीखा विरोध

उम्मीदवारों के नाम का ऐलान होते ही बंगाल के कई जिलों में भारी असंतोष भी देखने को मिला है। मालदा में तो स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पार्टी दफ्तर के भीतर जमकर कुर्सियां चलीं। स्थानीय नेता आसिफ महबूब को उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज कार्यकर्ताओं ने कार्यालय में तोड़फोड़ की और सड़कों पर टायर जलाकर अपना गुस्सा जाहिर किया। हंगामे की खबर मिलते ही पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। यह आक्रोश बताता है कि टिकट बांटने को लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं में कहीं न कहीं गहरी नाराजगी है, जो चुनाव से ठीक पहले पार्टी के लिए एक बड़ी सिरदर्दी साबित हो सकती है।

दो चरणों में मतदान और चार मई को आएंगे नतीजे

पश्चिम बंगाल में इस बार चुनावी जंग दो मुख्य चरणों में सिमटी हुई है। निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, राज्य में 23 और 29 अप्रैल को मतदान की प्रक्रिया संपन्न होगी। इस महामुकाबले का अंतिम फैसला 4 मई को मतगणना के साथ होगा। कांग्रेस के लिए यह चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है, क्योंकि 2021 के चुनावों में पार्टी का खाता तक नहीं खुल सका था। अब ममता बनर्जी की पार्टी को नजरअंदाज कर अकेले मैदान में उतरना कांग्रेस के आत्मविश्वास को दर्शाता है या यह एक रणनीतिक भूल होगी, इसका फैसला बंगाल की जनता के हाथों में है।

Navbharat Live
navbharatlive.com