
बिहार में 'पुत्र मोह' के बवाल के बीच उपेंद्र कुशवाहा का बड़ा एक्शन ( उपेंद्र कुशवाहा की परिवार के साथ फोटो- सोशल मीडिया)
Upendra Kushwaha RLM Bihar politics News: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने रविवार को एक ऐसा फैसला लिया जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने अपनी पार्टी की प्रदेश और सभी जिला इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह कड़ा फैसला रविवार को आयोजित कोर कमेटी की बैठक में लिया गया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पार्टी के भीतर मंत्री पद और परिवारवाद को लेकर असंतोष के गहरे सुर फूट रहे थे। कुशवाहा के इस निर्णय को पार्टी में मचे घमासान को नियंत्रित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
संगठन को सुचारू रूप से चलाने के लिए फिलहाल व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। बैठक में पांच सदस्यीय संचालन समिति का गठन किया गया है, जो अब पार्टी की कमान संभालेगी। इस समिति का संयोजक मदन चौधरी को बनाया गया है। उनके साथ सुभाष चंद्रवंशी, प्रशांत पंकज, हिमांशु पटेल और आरके सिन्हा को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह समिति पार्टी के सभी कार्यक्रमों, गतिविधियों और अंतरिम संगठनात्मक प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेगी। कोर कमेटी की इस अहम बैठक में माधव आनंद, आलोक सिंह, रामपुकार सिन्हा, जंगबहादुर सिंह, अंगद कुशवाहा और स्मृति कुमुद जैसे प्रमुख नेता मौजूद रहे।
हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की सहयोगी आरएलएम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 6 में से 4 सीटों पर जीत हासिल की थी। कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता सासाराम सीट से जीतकर विधानसभा पहुंची हैं। लेकिन विवाद की असली वजह बनी नीतीश कैबिनेट में मंत्री पद का बंटवारा। उपेंद्र कुशवाहा ने अपने जीते हुए विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करते हुए, बिना चुनाव लड़े अपने बेटे दीपक प्रकाश को पंचायती राज मंत्री बनवा दिया। इस फैसले ने पार्टी के भीतर बगावत की आग भड़का दी है। बेटे को मंत्री बनाने के बाद पार्टी के सात बड़े नेताओं ने एक साथ इस्तीफे की झड़ी लगा दी, जिससे पार्टी बिखरने की कगार पर आ गई।
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उपेंद्र कुशवाहा जो अब तक समाजवाद की बातें करते थे, उन पर अब खुले तौर पर वंशवाद को बढ़ावा देने का आरोप लग रहा है। राजनीति में इस ‘पुत्र मोह’ ने पार्टी के पुराने और वफादार साथियों को नाराज कर दिया है। इस्तीफों के दौर और आंतरिक कलह को देखते हुए ही रविवार को आनन-फानन में कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई और पूरी कार्यकारिणी को भंग करने का फैसला लिया गया। अब देखना होगा कि नई पांच सदस्यीय समिति पार्टी में लगी बगावत की इस आग को बुझा पाती है या नहीं। फिलहाल, कुशवाहा के इस फैसले ने बिहार की राजनीति का पारा और चढ़ा दिया है।






