टिकारी विधानसभा: NDA के लिए सीट बरकरार रखना चुनौतीपूर्ण! जानें क्या है पूरा चुनावी समीकरण
Bihar Assembly Elections: टिकारी विधानसभा सीट पर अनिल कुमार (हम) ने 2020 में मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी। 2024 लोकसभा में राजद की बढ़त के बाद बिहार चुनाव 2025 में NDA के लिए चुनौती है।
- Written By: अमन उपाध्याय
टिकारी विधानसभा, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Tikari Assembly Constituency: बिहार के गया जिले का टिकारी विधानसभा क्षेत्र जिसे टेकारी भी कहा जाता है, कभी 250 वर्षीय टेकारी राज का केंद्र हुआ करता था। इस सीट का ऐतिहासिक गौरवशाली रहा है, लेकिन आज यह अपनी पूर्व गरिमा से दूर, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और एनडीए (NDA) गठबंधन (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा-हम) के बीच होने वाले कड़े चुनावी मुकाबले के लिए जानी जाती है।
टेकारी राज की गौरवशाली और हिंसक विरासत
टिकारी राज (1709–1958) 2,046 गांवों पर शासन करता था।
राजा की उपाधि: धीर सिंह को मुगलों और अंग्रेजों का समर्थन करने के बदले में ‘राजा’ और फिर ‘महाराजा’ की उपाधि मिली।
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पतन: स्वतंत्रता के बाद जमींदारी प्रथा की समाप्ति ने इस राजवंश के पतन को जन्म दिया, जो रक्तपात और हिंसक विवादों में बदल गया।
वर्तमान स्वरूप: आज टिकारी मुख्यतः ग्रामीण प्रकृति का क्षेत्र है, जहाँ साक्षरता दर मात्र 56.66% है, और यह अपनी ऐतिहासिक विरासत से काफी भिन्न है।
वर्तमान राजनीतिक समीकरण: NDA का मामूली अंतर
टिकारी, औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली छह विधानसभा सीटों में से एक है। 2010 से अनिल कुमार इस क्षेत्र में प्रमुख राजनीतिक चेहरा बनकर उभरे हैं:
2010: अनिल कुमार ने जदयू के टिकट पर जीत दर्ज की।
2020 की जीत: हम (हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा) के अनिल कुमार ने जदयू और बीजेपी के समर्थन से राजद के उम्मीदवार को 2,630 वोटों के मामूली अंतर से हराया।
LJP का प्रभाव: 2020 में लोजपा ने एनडीए से अलग होकर 16,000 से अधिक वोट ले लिए थे, जिसने मुकाबले को बेहद कड़ा बना दिया था।
2025 की चुनौती: राजद की बढ़त भारी
NDA के लिए 2025 में यह सीट बरकरार रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
राजद की बढ़त: 2024 के लोकसभा चुनावों में राजद ने औरंगाबाद सीट जीतकर टिकारी विधानसभा क्षेत्र में 9,242 वोटों की बढ़त हासिल की थी। यह बढ़त आगामी विधानसभा चुनाव में राजद के लिए मजबूत आधार तैयार करती है।
जातीय गणित: टिकारी एक सामान्य सीट होने के बावजूद, यहाँ का जातीय समीकरण निर्णायक है:
अनुसूचित जातियां (SC): आबादी 23.88 प्रतिशत है, जो किसी भी चुनाव का रुख पलटने की क्षमता रखती है।
मुस्लिम मतदाता: 5.9 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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ग्रामीण फोकस: लगभग 95% मतदाता ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं, जिससे यहाँ के स्थानीय मुद्दे (शिक्षा, कृषि, रोजगार) चुनावी नतीजों में महत्वपूर्ण होते हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में, हम के अनिल कुमार के सामने 2024 के राजद के मजबूत प्रदर्शन के सामने अपनी सीट बचाए रखने और मामूली अंतर को बरकरार रखने की बड़ी चुनौती होगी।
