लालू प्रसाद के निजी बंगले की जांच कराने की तैयारी में सरकार, क्या ये घर भी छीन जाएगा?

Bihar Government: JDU ने आरोप लगाया है कि लालू ने सरकार से विधायकों-सांसदों के लिए को-ऑपरेटिव सोसाइटी को मिली जमीन में से करीबी विधायकों के नाम आवंटित जमीन को अपने नाम ट्रांसफर करा लिया।
The government is preparing to investigate Lalu Prasad private bungalow, Will this house also be taken away?
लालू प्रसाद और उनका घर।
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Lalu Prasad News: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद का राजधानी पटना के कौटिल्य नगर वाला बंगला विवादों में आ गया है। जदयू ने आरोप लगाया है कि लालू ने नियमों का उल्लंघन कर सरकार द्वारा विधायकों-सांसदों के लिए को-ऑपरेटिव सोसाइटी को दी गई जमीन में से अपनी पार्टी के करीबी विधायकों/ पार्षदों के नाम आवंटित जमीन को अपने नाम ट्रांसफर या खरीद लिया, जबकि नियम के अनुसार को-ऑपरेटिव सोसाइटी में एक विधायक को सिर्फ एक प्लॉट मिलना था। मगर, लालू ने अपने आसपास के पांच प्लॉट को लेकर अपने प्लॉट से मिलाया और अब इसी जमीन पर लालू का बंगला बन रहा है।

जदयू के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा ने भी मामले की जांच की मांग डिप्टी सीएम और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर की है। गुड्डू बाबा ने 2016 में जनप्रतिनिधियों के जमीन आवंटन पर कोर्ट में याचिका दाखिल कर सवाल उठाया था, जिसकी सुनवाई जारी है। लालू-राबड़ी की इस जमीन पर पूर्व डिप्टी सीएम दिवंगत सुशील मोदी ने अपनी किताब लालू लीला में भी विस्तार से लिखा है। इस किताब में भी सुशील मोदी ने जांच-पड़ताल के बाद ये लिखा था कि लालू को एक प्लॉट अलॉट हुआ था और चार मंत्री-विधायकों को आवंटित जमीन भी काफी कम कीमत पर लालू ने अपने नाम लिखवा लिया।

जमीन वेटनरी कॉलेज की थी पूरी जमीन

दरअसल, 1987 में बिहार सांसद और विधान मंडलीय सदस्य सहकारी समिति को 15 एकड़ सरकारी जमीन दी गई थी। यह पूरी जमीन वेटनरी कॉलेज की थी। तब इस को-ऑपरेटिव को जमीन देने का उद्देश्य यह था कि जिन पूर्व या वर्तमान विधायकों, सांसदों या पार्षदों का निजी आवास पटना में नहीं है, उन्हें जमीन उपलब्ध कराया जाए। अलॉटमेंट को लेकर कुछ कड़े नियम बनाए गए, जिससे विधायक सांसद कोई गड़बड़ी न कर सकें।

1992 में लालू को अलॉट हुआ था एक प्लॉट

जमीन 30 साल की लीज पर दी गई थी। इसका लीज 31 दिसंबर 2017 को खत्म हो गया था। मगर, पिछले साल 2025 में चुनाव से ठीक पहले इसका रिन्युअल किया गया। लालू प्रसाद को 1992 में जमीन अलॉट हुआ था, जब वे मुख्यमंत्री थे। उनके करीबी नेता जयप्रकाश नारायण यादव इस को-ऑपरेटिव के चेयरमैन थे। सहकारी समिति के बायलॉज की कंडिका 45 (2) में प्रावधान है कि किसी भी सदस्य को एक से अधिक प्लॉट लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही सहकारी समिति को एक से अधिक प्लॉट किसी को आवंटित या स्थानांतरित करने का अधिकार भी नहीं है।

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