
तेजस्वी यादव, फोटो- सोशल मीडिया
77th Republic Day Bihar: बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से अपना संदेश साझा किया। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान स्वतंत्रता सेनानियों, संविधान निर्माताओं और अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया। तेजस्वी ने इस बात पर जोर दिया कि आज का दिन हमें उन बलिदानों की याद दिलाता है जिनके कारण भारत एक अखंड और संप्रभु राष्ट्र के रूप में खड़ा है। उनके अनुसार, भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखना हर पीढ़ी का दायित्व है।
शुभकामनाओं के बीच तेजस्वी यादव का संदेश राजनीतिक रूप से काफी आक्रामक रहा। उन्होंने वर्तमान एनडीए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज देश की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सरकार पर “विपरीत सामाजिक, विपरीत आर्थिक और विपरीत संवैधानिक” नीतियों को लागू करने का आरोप लगाया। तेजस्वी का मानना है कि संविधान लागू होने के दशकों बाद भी, जहाँ लोकतंत्र को अधिक परिपक्व और मजबूत होना चाहिए था, वहीं अब इसे कमजोर करने के सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने अपने संदेश में एक बेहद गंभीर मुद्दे की ओर इशारा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें संविधान की मूल भावना, यानी प्रस्तावना में बदलाव करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने इसे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक “खतरनाक संकेत” बताया। उनके अनुसार, संविधान की प्रस्तावना वह आत्मा है जिस पर हमारे देश का पूरा लोकतांत्रिक ढांचा टिका हुआ है और इसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप भारत की धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।
विपक्ष के नेता ने उन ताकतों को ‘तानाशाह’ करार दिया जो उनके अनुसार संविधान की मूल आत्मा पर हमला कर रही हैं। उन्होंने एक ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए तंज कसा कि ये वही ताकतें हैं जिनका भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं रहा है। तेजस्वी ने कहा कि जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई में खून नहीं बहाया, वे आज लोकतंत्र और संविधान को अपने अनुसार मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि देश की जनता के साथ विश्वासघात है।
अपने संदेश के अंतिम भाग में तेजस्वी यादव ने देश के आम नागरिकों को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराया। उन्होंने अपील की कि सभी भारतीय नागरिक संविधान की रक्षा के लिए एक सामूहिक प्रतिज्ञा लें। उन्होंने याद दिलाया कि भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए बहुत बड़ा संघर्ष और बलिदान दिया गया है। अब यह हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह इन संवैधानिक मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिए जागरूक रहे और किसी भी अलोकतांत्रिक प्रयास का विरोध करे।
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तेजस्वी यादव का यह राजनीतिक संदेश ऐसे समय में आया है जब पूरा बिहार 77वें गणतंत्र दिवस को देशभक्ति और हर्षोल्लास के साथ मना रहा है। राजधानी पटना सहित पूरे राज्य में सरकारी भवनों और प्रमुख संस्थानों पर शान से तिरंगा फहराया गया। जगह-जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और महापुरुषों को याद किया गया। तेजस्वी का यह रुख स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में बिहार और देश की राजनीति में ‘संविधान और लोकतंत्र’ ही मुख्य विमर्श रहने वाले हैं।






