जदयू कार्यकर्ता (सोर्स- सोशल मीडिया)
Bihar Politics: बिहार में सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। विपक्षी दल भाजपा और जदयू पर तंज कर रहे हैं, तो वहीं जेडीयू कार्यकर्ता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। नाराज पार्टी कार्यकर्ता शीर्ष नेतृत्व पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जैसे ही राज्यसभा के लिए नामांकन करने का ऐलान किया, उनकी पार्टी जेडीयू के दर्जनों कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन पर उतर आए। इन कार्यकर्ताओं ने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
जेडीयू कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं पर नीतीश कुमार को धोखा देने और उन्हें सत्ता छोड़ने पर मजबूर करने का आरोप लगाया। नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नॉमिनेशन से बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बन सकता है। जेडीयू कार्यकर्ताओं ने सरकार में मंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू नेता संजय गांधी को मुख्यमंत्री आवास में घुसने से रोकने की कोशिश की। जेडीयू कार्यकर्ताओं में मुस्लिम और ओबीसी समुदाय के नेता शामिल थे।
प्रदर्शनकारियों में शामिल जेडीयू नेता और भूमि संघर्ष सेना के प्रमुख रूपेश पटेल ने कहा, “जो कुछ भी हो रहा है वह संजय झा का काम है, जिन्होंने ललन सिंह के साथ मिलकर जेडीयू पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। झा विभीषण हैं और बीजेपी के इशारे पर काम करते हैं।”
जेडीयू कार्यकर्ता संजय मेहता ने कहा, “ऑपरेशन लोटस अब पूरा हो गया है। बीजेपी ने जेडीयू से सत्ता छीन ली है।” जेडीयू कार्यकर्ताओं के दोनों नेताओं के खिलाफ नारे लगाने के बाद, बिहार पुलिस ने मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर बैरिकेडिंग कर दी है।
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जेडीयू के प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के सीनियर नेताओं लल्लन सर्राफ और विजय कुमार चौधरी के खिलाफ भी नारे लगाए और चेतावनी दी कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का समर्थन करने वाले जेडीयू नेताओं को नतीजे भुगतने होंगे।
एक और जेडीयू कार्यकर्ता ने कहा कि यह बिहार के लोगों के साथ अन्याय है। बहुत पिछड़े समुदायों, पिछड़े वर्गों और महिलाओं ने विकास के नाम पर नीतीश कुमार को वोट दिया था। अब वे जनादेश को पलटने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना अहम होगा कि कार्यकर्ताओं का आक्रोश कितना लंबा चलता है।