ओसामा और जमा खान, जो इस चुनाव में जीते हैं।
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का रिजल्ट आ चुका है। एनडीए ने 243 में 201 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके साथ ही एनडीए की प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता कायम है। दूसरी ओर महागठबंधन की सीटें पिछले चुनाव की तुलना में आधी से भी कम बचीं।
इस रिजल्ट में राज्य में मुस्लिम प्रतिनिधित्व घट गया। पिछले 20 वर्षों से बिहार विधानसभा में मुस्लिम विधायकों की संख्या कम होती जा रही है। इस बार यह संख्या इतिहास की सबसे कम केवल 10 तक सिमट गई।
विधानसभा की 243 सीटों में से सिर्फ 10 मुस्लिम उम्मीदवार जीते हैं। कई मुस्लिम उम्मीदवार बहुत की कम वोटों से हार गए हैं। नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से जमा खान ने जीत दर्ज की है। लाल प्रसाद की पार्टी राजद से आसिफ अहमद और ओसामा शहाब जीते हैं। वहीं, कांग्रेस से कमरूल होदा और ढाका से फैसल रहमान की जीत हुई। असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM से अख्तरुल ईमान, तौसीफ आलम, मुर्शीद आलम, सरवर आलम और गुलाम सरवर ने सफलता हासिल की है। 2020 के चुनाव में 19 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। साल 2015 में 24 मुस्लिम विधायक बने थे। वहीं, साल 2010 में 19 मुस्लिम कैंडिडेट चुनाव जीत गए थे।
RJD- 08
AIMIM- 05
कांग्रेस- 04
BSP- 01
CPI-ML- 01
RJD- 12
कांग्रेस- 06
JDU- 05
CPI-ML- 01
2010 में 19 मुसलमान विधायक निर्वाचित हुए थे। इनमें जनता दल यू (JDU) से 7, राजद (RJD) से 6, लोजपा (LJP) से 3, कांग्रेस से 2 और भारतीय जनता पार्टी (BJP) का 1 विधायक भी शामिल था। साल 2005 में 16 मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी।
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इस बार विभिन्न दलों से 34 मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में रहे। राजद ने सबसे अधिक 18 मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था। बिहार में मुस्लिम नेतृत्व की स्थिति दयनीय है। 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य में 17,557,809 मुसलमान थे। राज्य की 17.7% आबादी होने के बावजूद विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व केवल 10 विधायकों तक सीमित है। 1985 को छोड़कर मुसलमान विधायकों की संख्या कभी भी 10 प्रतिशत से ऊपर नहीं पहुंची। अब तक के इकलौते मुस्लिम मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर ने 1970 के दशक में दो वर्ष से भी कम समय तक बिहार का नेतृत्व किया था।