बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Nitish Kumar Not Joining Union Cabinet: बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लिया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर दी है। पिछले 25 सालों से वह बिहार के सत्ता की कमान अपने हाथों में रखे थे। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें केंद्र सरकार में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
हालांकि, अब पार्टी के करीबी सूत्रों की ओर से ऐसा जानकारी आ रही है कि नीतीश कुमार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होंगे। उनका मुख्य ध्यान बिहार की नई सरकार को मार्गदर्शन देने और जनता दल (यूनाइटेड) के संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर रहेगा।
नीतीश कुमार का नया वर्किंग मॉडल अब दिल्ली और पटना के बीच बंटा होगा। वे केवल संसद सत्र के दौरान ही दिल्ली में रहेंगे, जबकि अपना शेष अधिकांश समय बिहार की जनता के बीच बिताएंगे। इससे साफ है कि भले ही उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी हो, लेकिन बिहार की सियासत और अपनी पार्टी पर उनकी पकड़ और सक्रियता पहले जैसी ही बनी रहेगी।
गौरतलब है कि नीतीश कुमार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेते ही बिहार में उनके दो दशक लंबे शासन का औपचारिक अंत हो गया है। अब सबकी निगाहें 14 अप्रैल पर टिकी हैं, जब एनडीए (NDA) विधायक दल की बैठक में बिहार के नए मुख्यमंत्री का चुनाव किए जाने की प्रबल संभावना है। बिहार के राजनीतिक जानकारों का ऐसा मानना है कि इस बार राज्य को बीजेपी के कोटे से मुख्यमंत्री मिल सकता है।
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इससे पहले गुरुवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान नीतीश कुमार ने कहा कि वहां (बिहार) का छोड़ के यहां आए हैं… नए लोगों को कर देंगे। वहां इतना काम किए हैं…अब मेरे मन में हुआ कि अब यहीं (दिल्ली) रहें…वही कर रहे हैं। तीन-चार दिन में बिहार नया करवा देंगे (मतलब नई सरकार वहां बन जाएगी)। पहले हम दिल्ली में ही थे। बीच में बिहार चले गए। फिर वापस यहां आ गए हैं। नीतीश कुमार के कहने का मतलब था कि पहले वो केंद्र में मंत्री थे, सांसद थे, इसके बाद बिहार के मुख्यमंत्री बने। अब वापस फिर से वे दिल्ली आ गए हैं।