रिटायरमेंट के अगले ही दिन हरिवंश की राज्यसभा में वापसी! JDU के पास ही रहेगा उपसभापति का पद, किए गए मनोनीत

Harivansh Rajya Sabha Nominated: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हरिवंश को राज्यसभा सदस्य मनोनीत किया है। 9 अप्रैल को कार्यकाल खत्म होने के बाद अब वे मनोनीत कोटे से सदन में वापस लौटेंगे।
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हरिवंश (Image- Social Media)
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Rajya Sabha Deputy Chairman Harivansh: हरिवंश, जो राज्यसभा(Rajya Sabha) के उपसभापति रह चुके हैं, उन्हें एक बार फिर राज्यसभा की सदस्यता मिल गई है। इस बार उन्हें जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से नहीं भेजा गया था, जिससे माना जा रहा था कि उनका कार्यकाल समाप्त हो गया है। हालांकि अब उन्हें एक और मौका मिला है। द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी आदेश के तहत उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया है।

अधिसूचना के मुताबिक, एक मनोनीत सांसद के रिटायर होने से जो सीट खाली हुई थी, उसी पर हरिवंश को नामित किया गया है। इसके साथ ही वे फिर से राज्यसभा के सदस्य बन गए हैं।

हरिवंश, जो फिलहाल राज्यसभा(Rajya Sabha) के उपसभापति (Deputy Chairman) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, संसदीय प्रक्रियाओं और विधायी कार्यों का गहरा अनुभव रखते हैं। उनका पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हुआ था। जेडीयू (JD-U) द्वारा पुन: नामांकित न किए जाने के बाद, अब राष्ट्रपति द्वारा उन्हें मनोनीत कोटे से सदन में वापस भेजा गया है। ऐसा माना जा रहा है कि उनको उपसभापति के रूप में फिर से चुना जा सकता है।

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हरिवंश राज्यसभा में किए गए मनोनीत (Image- Social Media)

राष्ट्रपति का विशेषाधिकार

भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वे साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले 12 व्यक्तियों को राज्यसभा(Rajya Sabha) के लिए मनोनीत कर सकें। हरिवंश का मनोनयन इन्हीं संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत किया गया है।

नीतीश कुमार आज लेगें शपथ

बता दें कि नीतीश कुमार(Nitish Kumar) आज से अपने राजनीतिक जीवन का नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं। वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे, जिससे यह संकेत मिलता है कि अब उनकी सक्रिय भूमिका केंद्र की राजनीति में ज्यादा होगी। करीब 20 सालों तक बिहार की सत्ता संभालने के बाद यह उनके करियर का बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

नीतीश कुमार के इस कदम के साथ ही बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया को लेकर हलचल तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक, वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। माना जा रहा है कि 14 अप्रैल तक इस्तीफा और 16 अप्रैल के आसपास नई सरकार का गठन संभव है।

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