सियासत-ए-बिहार: पप्पू यादव की ख्वाहिश सुनकर तमतमा गए थे लालू, सामने रखा था बेटी से शादी का प्रस्ताव!
Bihar Politics: पप्पू यादव की गिनती बिहार के दबंग छवि वाले नेताओं में होती है। उनका सियासी सफर जितना विवादित है उतना ही दिलचस्प भी है। हम आज आपके लिए ऐसा ही एक किस्सा लेकर आए हैं...
- Written By: अभिषेक सिंह
पप्पू यादव व लालू प्रसाद यादव (कॉन्सेप्ट फोटो)
Siyasat-E-Bihar: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव इन दिनों राहुल गांधी के साथ बिहार में ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ का हिस्सा बने हुए हैं। सबसे खास यह कि RJD नेता तेजस्वी यादव भी इस यात्रा में शामिल हैं। जबकि लोकसभा चुनाव के समय के आरजेडी की ही वजह से पप्पू यादव को कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया था, और उन्हें निर्दलीय मैदान में उतरना पड़ा। यही वजह है कि पप्पू और तेजस्वी का एक साथ एक मंच पर होना चर्चा का कारण बन गया है।
यह पहला मौका नहीं है जब आरजेडी, लालू यादव फैमिली और पप्पू यादव के बीच नजदीकियां देखने को मिली हैं। पप्पू यादव जब बिहार की सियासत में अपनी पहचान बनाने में लगे हुए थी तब भी लालू प्रसाद यादव से उनकी नजदीकियां थीं। लेकिन फिर पप्पू यादव ने लालू यादव के सामने एक ऐसी इच्छा जाहिर कर दी कि वह आगबबूला हो गए। और दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं।
दिलचस्प है पप्पू यादव का यह किस्सा
पप्पू यादव हमेशा ही कभी अपनी समाजसेवा के जरिए तो कभी बेबाक अंदाज के कारण हमेशा ही सुर्खियों में बने रहते हैं। उनकी गिनती बिहार के दबंग छवि वाले नेताओं में होती है। पप्पू यादव का सियासी सफर जितना विवादित है उतना ही दिलचस्प भी है। हम आज आपके लिए ऐसा ही एक किस्सा लेकर आए हैं।
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लालू की बेटी से शादी की ख्वाहिश
बिहार के वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर अपनी किताब ‘बंधु बिहारी- कहानी लालू यादव और नीतीश कुमार की’ में लिखते हैं कि पप्पू यादव का जाना ज़ाहिर तौर पर तब हुआ जब उन्होंने अपने नेता (लालू यादव) की बड़ी बेटी मीसा से शादी करने की इच्छा जताई।
आगबबूला हो गए थे लालू यादव
लालू यादव अपने मातहत की इस हिमाकत पर आगबबूला हो गए थे। पप्पू यादव गुंडे के तौर पर तो काम के थे, लेकिन लालू यादव उन्हें दामाद के तौर पर स्वीकार नहीं कर पाए। जिसके बाद पप्पू यादव और लालू यादव फैमिली के बीच दूरियां आने लगी और तकरीबन रिश्ते खत्म से हो गए।
कैसी थी पप्पू यादव की छवि
संकर्षण ठाकुर किताब में आगे लिखा है कि सहरसा-पूर्णिया इलाकों में बेतहाशा हिंसा करके कुख्यात होने वाला एक नासमझ युवक पप्पू यादव, लालू यादव की सामाजिक क्रांति द्वारा राजनीति में लाए गए तत्वों का प्रतीक था। जो कि थोड़ा गुंडा, थोड़ा ठेकेदार, थोड़ा जाति-प्रधान, थोड़ा राजनीतिक मुनाफाखोर था।
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किताब में आगे लिखा गया है कि उसका शरीर हाथी के बच्चे जैसा और उसकी छवि एक पागल, भगदड़ मचाने वाले की थी। पूर्णिया से सांसद के रूप में प्रसिद्धि पाने से पहले, वह निजी तौर पर लोगों को यह बताने में गर्व महसूस करता था कि बिहार में ऐसी कोई जेल नहीं है जहां वह न गया हो।
लोकसभा चुनाव में क्या हुआ था?
बिहार में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे SIR के खिलाफ विपक्षी दलों की मतदाता अधिकार यात्रा के दौरान राजद नेता तेजस्वी यादव और पप्पू यादव के बीच नजदीकियां बढ़ती देखी गई हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान पप्पू और तेजस्वी के बीच आमने-सामने की टक्कर तब हुई थी, जब लालू ने जदयू से बीमा भारती को बुलाकर पूर्णिया से चुनाव लड़ाया था और कांग्रेस में शामिल होने के बावजूद पप्पू को निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा था।
