बिहार चुनाव में पैसा पानी की तरह बहा! विश्व बैंक के फंड से वोटों की दलाली, PK की पार्टी का खुलासा
बिहार चुनाव संपन्न चुका है और यहां पर NDA ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। इसी कड़ी में अब चुनाव के नतीजों के बाद आंकलन पर सियासत गरम हो रही है। चुनाव में पैसा पानी की तरह बहाया गया है।
- Written By: सौरभ शर्मा
जनसुराज का बड़ा आरोप 40,000 करोड़ बहाकर खरीदे गए वोट?
Bihar Election Result Analysis: बिहार चुनाव संपन्न चुका है और यहां पर NDA ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। इसी कड़ी में अब चुनाव के नतीजों के बाद आंकलन पर सियासत गरम हो रही है। नतीजों के बाद चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने नीतीश कुमार सरकार पर एक गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि चुनाव जीतने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया गया है, जिसकी कुल रकम करीब 40,000 करोड़ रुपए है। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि इस राशि में से 14,000 करोड़ रुपए विश्व बैंक के उस फंड से निकाले गए, जो विकास परियोजनाओं के लिए निर्धारित था, और उसे ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत मतदाताओं में बांटा गया। इस कदम को पार्टी ने मतदाताओं को प्रभावित करने का अनैतिक प्रयास बताया है।
जन सुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने प्रेस वार्ता में यह बड़ा दावा किया कि जून से लेकर मतदान के दिन तक यह भारी-भरकम राशि खर्च की गई। उनका कहना था कि जनता के पैसे से वोट खरीदे गए और बिहार की अर्थव्यवस्था इतनी बड़ा खर्चा झेलने में सक्षम नहीं है। पार्टी के प्रवक्ता पवन वर्मा ने भी इस आरोप को दोहराया कि चुनाव आचार संहिता लागू होने से महज एक घंटे पहले 14,000 करोड़ रुपए निकालकर 1.25 करोड़ महिला मतदाताओं के बीच वितरित किए गए। यह 10,000 रुपए की नकद राशि थी जिसने, कई विश्लेषकों के अनुसार, NDA की जबरदस्त जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
खाली हुआ खजाना, कर्ज का बोझ बढ़ा
पार्टी का आरोप है कि इस भारी खर्च के कारण राज्य का खजाना खाली हो गया है। पवन वर्मा ने दावा किया कि वर्तमान में बिहार का सार्वजनिक ऋण 4.06 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जिस पर प्रतिदिन 63 करोड़ रुपए का ब्याज चुकाना पड़ रहा है। वर्मा ने सवाल उठाया कि भले ही फंड को कानूनी तौर पर डायवर्ट किया जा सकता हो, लेकिन इसकी नैतिकता पर सवाल उठना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि 4 करोड़ महिला मतदाताओं में से 2.5 करोड़ को अभी तक राशि नहीं मिली थी, और अफवाह थी कि अगर एनडीए वापस सत्ता में नहीं आती है तो उन्हें आगे लाभ नहीं मिलेगा, जिससे मतदाताओं पर अलग असर पड़ा।
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अनैतिक कदम से चुनाव प्रभावित?
जन सुराज पार्टी ने, जिसने 238 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन एक भी नहीं जीत पाई, इस पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है। पार्टी ने कहा कि विश्व बैंक से मिली 21,000 करोड़ रुपए की राशि में से 14,000 करोड़ रुपए निकाले गए थे, जो किसी अन्य परियोजना के लिए थे। उदय सिंह ने कहा, “इस चुनाव का परिणाम खरीदा गया है।” एनडीए ने 202 सीटें जीतकर शानदार जीत हासिल की, जिसमें भाजपा को 89 और जद(यू) को 85 सीटें मिलीं। जन सुराज का मानना है कि यह 10,000 रुपए की नकद हस्तांतरण की नीति ही थी जिसने परिणाम को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया। पवन वर्मा ने आशंका जताई कि यह चलन अन्य राज्यों – जैसे पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु – के आगामी चुनावों को भी प्रभावित कर सकता है।
