असम में महिला मतदाताओं की संख्या अधिक लेकिन महिला प्रत्याशियों की संख्या में गिरावट

Lok Sabha Election 2024
फाइल फोटो
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गुवाहाटी: असम में महिला मतदाताओं की संख्या अधिक होने के बावजूद केवल 12 महिला उम्मीदवार 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं जबकि पिछली बार 14 महिला प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। ये 12 महिला उम्मीदवार राज्य में 14 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से सात में चुनाव लड़ रही हैं। असम में कुल 2,45,72,144 मतदाता हैं जिनमें से 1,23,39,241 महिला मतदाता और 1,23,25,293 पुरुष मतदाता हैं।

महिला मतदाताओं की संख्या अधिक होने के बावजूद महिला प्रत्याशियों की संख्या में गिरावट 2014 से जारी है जब 16 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने एक महिला उम्मीदवार बिजुली कालिता मेधी को प्रतिष्ठित गुवाहाटी सीट से टिकट दिया है जबकि विपक्षी दल कांग्रेस ने गुवाहाटी में मीरा बोरठाकुर गोस्वामी तथा काजीरंगा में रोजलीना टिर्की को उम्मीदवार बनाया है। छोटे दलों में गण सुरक्षा पार्टी ने दो महिलाओं जबकि हिंदू समाज पार्टी, गण संग्राम परिषद, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) तथा वोटर्स पार्टी ने एक-एक महिला को टिकट दिया है और तीन महिलाएं निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं।

काजीरंगा में सबसे अधिक तीन महिला प्रत्याशी हैं। उसके बाद गुवाहाटी और कोकराझार (एसटी) में दो-दो और सोनितपुर, दर्रांग-उदलगुड़ी, नगांव, बारपेटा और धुबरी में एक-एक महिला प्रत्याशी है। देश में पहले आम चुनाव से लेकर अब तक केवल 18 महिला उम्मीदवारों ने राज्य में लोकसभा चुनाव लड़ा है। बहरहाल, मतदान प्रक्रिया में महिला मतदाताओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि आयी है। 19 अप्रैल और 26 अप्रैल को पहले दो चरणों के मतदान में 79.92 प्रतिशत मतदान हुआ।

गुवाहाटी से कांग्रेस उम्मीदवार मीरा बोरठाकुर गोस्वामी ने कहा कि उनकी पार्टी ने दो महिलाओं को टिकट दिया है जबकि संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित करने वाली भाजपा ने इस पूर्वोत्तर राज्य में केवल एक महिला को टिकट दिया है। उन्होंने आरोप लगाया, भाजपा सरकार महिलाओं को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करती है और उसने उनमें डर पैदा किया है कि अगर वे भाजपा के लिए वोट नहीं करती या चुनावी बैठकों में भाग नहीं लेती हैं तो योजनाओं से उनके नाम हटा दिए जाएंगे। वहीं, भाजपा उम्मीदवार मेधी ने दावा किया कि किसी पूर्ववर्ती सरकार ने महिलाओं पर इतना ध्यान केंद्रित नहीं किया जितना की भाजपा ने उन्हें विभिन्न लाभ देकर पिछले 10 साल में किया है। (एजेंसी)

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