Bihar Chunav Results: महागठबंधन को क्यों मिली हार? वो 5 बड़े कारण…जिन्होंने बनवा दी नीतीश की सरकार
Bihar Chunav Result 2025: चुनाव नतीजों के रुझानों के बीच लोग उन कारणों की खोज करने लगे हैं, जिसकी बदौलत एनडीए को शानदार जीत और महागठबंधन को करारी हार मिल रही है।
- Written By: अभिषेक सिंह
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
5 Reasons for the NDA’s Victory in Bihar: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम सामने आ रहे हैं। जिसमें चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक एक बार फिर से नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए की सत्ता में वापसी होती हुई दिखाई दे रही है। इसके साथ ही नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू यहां शानदार प्रदर्शन करती हुई दिखाई दे रही है।
अभी तक के आंकड़ों की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड दोनों ही क्रमश: 83 और 79 सीटों पर आगे दिखाई दे रही है। चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (R) 22 सीटों पर और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा भी चार सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। सभी को जोड़ें तो एनडीए प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाता हुआ नजर आ रहा हा।
NDA सरकार-महागठबंधन की हार क्यों?
चुनाव नतीजों के रुझानों के बीच लोग उन कारणों की खोज करने लगे हैं, जिसकी बदौलत एनडीए को शानदार जीत और महागठबंधन को करारी हार मिल रही है। अगर आपके मन में भी ये सवाल उमड़ रहा है तो अब आप बिल्कुल सही जगह पहुंच चुके हैं। क्योंकि उनके जवाब हम आपको बताने जा रहे हैं…
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पहला कारण: महिलाओं को 10 हजार
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए के जबरदस्त प्रदर्शन के पीछे महिलाएओं को बड़ा कारण माना जा रहा है। इस बार चुनाव में जहां पुरुषों से 9 फीसदी ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया है। जिसके पीछे इलेक्शन से ठीक पहले नीतीश कुमार ने ‘महिला रोजगार योजना’ के तहत महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये डाले थे। अब माना जा रहा है कि इसका असर न केवल मतदान में, बल्कि नतीजों में भी दिख रहा है। वादा तेजस्वी ने भी महिला सम्मान के 30 हजार एकमुश्त देने का किया था, लेकिन वह भविष्य की बात थी, इसलिए उस पर वोटर्स को भरोसा करना मुश्किल हुआ होगा।
दूसरा कारण: बिहार में नीतीश कुमार
बिहार की सियासत में नीतीश कुमार वो नाम है, जिसे बड़े से बड़ा सियासी पंडित भी प्रिडिक्ट नहीं कर सकता है। दिवंगत पत्रकार संकर्षण ठाकुर भी ‘अकेला आदमी– कहानी नीतीश कुमार की‘ में लिख चुके हैं कि जब-जब यह कहा गया नीतीश कुमार खत्म होने वाले हैं, तब-तब उन्होंने दोगुनी स्ट्रेंथ के साथ कमबैक किया है। इस बार भी चुनाव के दौरान कुछ ऐसी ही बातें सामने आ रही थीं। लेकिन अब जब नतीजों में जेडीयू सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि यह नीतीश कुमार का आखिरी चुनाव हो सकता है, इस वजह से भी लोगों ने उन्हें ‘फेयरवेल गिफ्ट’ के तौर पर सीएम बनाने का फैसला किया है।
तीसरा कारण: मोदी-शाह का प्रचार
बिहार में प्रचंड बहुमत की एनडीए सरकार के पीछे पीएम नरेंद्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रचार को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। दोनों ही दिग्गज नेताओं ने चुनाव के दौरान राज्य में जमकर पसीना बहाया। उन मुद्दों को उठाया जो बिहार के लोगों को सीधा हिट कर रहे थे। ‘जंगल राज’ और ‘कट्टा पॉलिटिक्स’ इसी प्रचार नीति का एक उदाहरण है। राजनैतिक विश्लेषकों की मानें पीएम मोदी और अमित शाह की रैलियों और रोड शो ने भी यहां खूब माहौल बनाने का काम किया है।
चौथा कारण: RJD-कांग्रेस की रार
एनडीए के उम्दा प्रदर्शन और महागठबंधन की शिकस्त का एक और कारण बिहार में आरजेडी और कांग्रेस की आपसी तनातनी भी रही है। चुनाव की घोषणा के बाद पहले चरण के नामांकन की आखिरी तारीख से एक रात पहले तक दोनों ही दल सीट बटंवारा और कौन किस विधानसभा से चुनाव लड़ेगा ये तय नहीं कर पाए थे। कई सीटों पर आरजेडी और कांग्रेस दोनों ने ही उम्मीदवार उतार दिए। इससे जनता में एक गलत मैसेज यह भी गया होगा कि ये अगर सरकार में आए तो पूरे पांच साल इसी तरह की खींचतान देखने को मिल सकती है।
पांचवां कारण: केन्द्र में NDA सरकार
बिहार में बहार और फिर से नीतीशे कुमार के आने के पीछे का पांचवां और सबसे अहम कारण यह भी है कि केन्द्र में एनडीए की सरकार है। नीतीश कुमार की पार्टी भी बड़े सहयोगी के तौर पर साथ है। ऐसे में बिहार को विकास के रास्ते पर तेज रफ्तार पकड़ने के लिए केन्द्र से सहयोगी की आवश्यकता होगी तो वह आसानी से मिल जाएगा। यही वजह है कि जनता को नीतीश कुमार और एनडीए के वादों पर महागबंधन के मुकाबले कहीं ज्यादा भरोसा दिखाया है।
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फिलहाल, अभी बिहार में मतगणना जारी है। आंकड़ों में थोड़ा बहुत परिवर्तन होना संभव है, लेकिन बिहार में एनडीए की सरकार बननी तय मानी जा रही है। यानी एक बार फिर बिहार की जनता को नीतीश कुमार पर विश्वास जताया है और उन्हें सूबे की बागडोर सौंपने का फैसला किया है।
