गोबिंदपुर विधानसभा: RJD के सामने विरासत बचाने की चुनौती, महिला प्रत्याशियों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला
Bihar Assembly Elections: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नवादा की गोबिंदपुर सीट पर राजद के सामने यादव परिवार की विरासत बचाने की चुनौती है। ककोलत की ऐतिहासिक भूमि पर त्रिकोणीय मुकाबला है।
- Written By: अमन उपाध्याय
गोबिंदपुर विधानसभा, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Gobindpur Assembly Constituency: गोबिंदपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, बिहार के नवादा जिले में स्थित है और यह नवादा (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) के अंतर्गत आता है। यह सीट न केवल अपनी चुनावी गहमागहमी के लिए, बल्कि अपनी ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जानी जाती है। गोबिंदपुर विधानसभा की पहचान यहां का प्रसिद्ध ककोलत वाटरफॉल (जलप्रपात) है।
यह लोकप्रिय दृश्य के कारण पर्यटकों को खूब लुभाता है और भारत के सबसे अच्छे झरनों में से एक है। पौराणिक कथाओं और लोककथाओं से जुड़ा यह क्षेत्र, जहां मौर्य और गुप्तकालीन प्रभाव के प्रमाण मिलते हैं, Bihar Politics में भी एक गहरा और जटिल इतिहास रखता है।
भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व
ककोलत जलप्रपात की सुंदरता के साथ इसका पौराणिक इतिहास भी जुड़ा है, जहाँ यह माना जाता है कि एक प्राचीन राजा ऋषि के अभिशाप से अजगर में बदल गया था, जो झरने के भीतर रहता था। भगवान कृष्ण से जुड़ी लोककथाएं भी इस क्षेत्र की महत्ता को बढ़ाती हैं।
सम्बंधित ख़बरें
Mukesh Roshan को बिश्नोई गैंग से मिली धमकी, तेजस्वी के करीबी पूर्व विधायक ने बिहार पुलिस से मांगी सुरक्षा
Bharat Tiwari Encounter: सरेंडर के बाद भी भरत तिवारी का एनकाउंटर, बिहार पुलिस क्या छिपा रही? EXPLAINED
भरत तिवारी एनकाउंटर केस की होगी न्यायिक जांच, पुलिस पर उठ रहे सवालों के बीच CM सम्राट चौधरी का ऐलान
भरत तिवारी एनकाउंटर में नया मोड़, विपक्ष के बाद अब सत्तापक्ष ने भी उठाए गंभीर सवाल; वायरल VIDEO देख भड़की JDU
भौगोलिक दृष्टि से, गोबिंदपुर क्षेत्र से सकरी नदी गुजरी है। बारिश के मौसम में अक्सर यहां बाढ़ आती है, जिससे क्षेत्र के कुछ गांव एक-दूसरे से कट जाते हैं। हालांकि, इस क्षेत्र से एसएच-103 होकर गुजरता है, जो इसे राज्य और जिले के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।
राजनीतिक इतिहास: यादव परिवार का अटूट दबदबा
गोबिंदपुर की राजनीति में एक परिवार का दबदबा: यहां की जनता ने हमेशा पार्टियों से ज्यादा नेताओं को तवज्जो दी है, जिसका प्रमाण युगल किशोर यादव के परिवार की निरंतर सफलता है। युगल किशोर यादव ने 1969 में लोकतांत्रिक कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की।
इसके बाद उनकी पत्नी गायत्री देवी यादव ने 1970 में निर्दलीय, फिर 1980, 1985, 1990 (कांग्रेस) और 2000 में (राजद) के टिकट पर चार बार विधायक बनकर एक मिसाल कायम की।
परिवार की राजनीतिक विरासत को बेटे कौशल यादव ने संभाला, जो यहां से लगातार तीन बार विधायक बने (दो बार निर्दलीय और एक बार जदयू प्रत्याशी के रूप में)। यह विरासत अब कौशल यादव की पत्नी पूर्णिमा यादव को मिली है, जिन्होंने 2015 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी।
यह भी पढ़ें:- बाराचट्टी विधानसभा: दो महिला उम्मीदवारों में कड़ी टक्कर, जीतन राम मांझी की साख दांव पर
वर्तमान चुनावी चुनौती: राजद के सामने विरासत बचाने का दबाव
Bihar Assembly Election 2025 के मद्देनजर, इस बार विधानसभा चुनाव में युगल किशोर यादव की विरासत को बचाने की चुनौती बहू पूर्णिमा यादव के सामने है। 2020 में यह सीट राजद के खाते में आई और मोहम्मद कामरान विजयी हुए थे। हालांकि, राजद ने इस बार पूर्णिमा यादव को टिकट दिया है, जिससे यादव परिवार का प्रभुत्व फिर से स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प है, क्योंकि यहां तीनों प्रमुख दलों ने महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है।
राजद: पूर्णिमा यादव
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास): विनीता मेहता
जन सुराज पार्टी: पूनम कुमारी
महिला प्रत्याशियों के बीच यह त्रिकोणीय मुकाबला गोबिंदपुर विधानसभा सीट को नवादा जिले में सबसे रोमांचक बना रहा है।
