Bihar Chunav: बिहार में किसे मिलेंगी कितनी सीटें? शुरू हो गई भविष्यवाणियां, आपको चौंका देगा ये दावा

Bihar Politics: बिहार में पहले चरण का मतदान समाप्त होते ही सियासी माहौल शोलों में तब्दील होने लगा है। आरापों-प्रत्यारोपों के बीच अब सीटों को लेकर भविष्यवाणियां भी सामने आनी शुरू हो गई हैं।
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कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
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Bihar Assembly Elections: बिहार में हो रहे विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान समाप्त होते ही सियासी माहौल शोलों में तब्दील होने लगा है। एक तरफ सियासतदानों में आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर दोगुना हो गया है तो दूसरी तरफ सीटों को लेकर भविष्यवाणियां भी सामने आनी शुरू हो गई है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भागलपुर में कहा कि इस बार एनडीए ऐसा प्रदर्शन करेगा कि 2010 वाला रिकॉर्ड भी बौना नजर आएगा। उनका कहना है कि उस समय एनडीए ने 206 सीटें हासिल की थीं, जबकि 2025 के चुनाव परिणाम उससे भी बेहतर होंगे। इसके अलावा डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का जो 121 में से 110 सीटें जीतने वाले दावे पर भी उन्होंने मुहर लगाई है।

चुनाव के दिन भी बताए थे आंकड़े

हालांकि, गिरिराज सिंह ने ही 6 नवंबर को यानी वोटिंग के दिन पहले चरण की सभी 121 सीटों को जीतने का दावा भी किया था। उन्होंने वोट डालने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा था कि इस बार एनडीए बिहार में पहले चरण की सभी 121 सीटें जीतने जा रहा है।

चौधरी ने किया चौंकाने वाला दावा

पहले चरण के लिए बिहार में बीते 6 नवंबर को मतदान हो चुका है। जिसके तहत राज्य के 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटो पर वोटिंग हुई है। वोटिंग परसेंटेज भी इस बार काफी अधिक रहा है। EC के अनुसार, 25 साल बाद मतदान 60% के पार चला गया है। जिसे लेकर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने दावा किया ज्यादा वोटिंग उनके फेवर में है।

और क्या कुछ बोले सम्राट चौधरी?

उन्होंने कहा कि ज्यादा वोटिंग का मतलब साफ है, जनता सरकार के काम से संतुष्ट है और फिर से एनडीए पर भरोसा कर रही है। चौधरी ने तो यहां तक कह दिया कि इस बार लालू परिवार का कोई भी सदस्य विधानसभा तक नहीं पहुंच सकेगा। उन्होंने कहा कि लोग अब घर-परिवार वाली राजनीति पर नहीं बल्कि विकास की राजनीति पर भरोसा कर रहे हैं।

बिहार में टूट गए सारे रिकॉर्ड

इलेक्शन कमीशन के फाइनल आंकड़ों के मुताबिक बिहार में पहले चरण में कुल 65.08 प्रतिशत मतदान हुआ है। मतदान परसेंटेज में मुजफ्फरपुर सबसे आगे रहा जहां 70.96% वोटिंग दर्ज की गई। इसके अलावा समस्तीपुर, वैशाली, मधेपुरा जैसे जिलों में भी बढ़िया वोटिंग हुई है। ईसी के अनुसार, 1951-52 में बिहार में सबसे कम 42.6% मतदान हुआ था। इस बार वोट परसेंटेज साल 2000 के 62.67% के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ चुका है।

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