बिहार की सबसे ताकतवर पार्टी JDU का इतिहास, कभी NDA, तो कभी RJD के लिए नीतीश कुमार रहे खास
Janata Dal United: बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड पिछले दो दशकों से एक प्रमुख पार्टी की भूमिका में रही है। इसके मुखिया नीतीश कुमार हैं, सुशासन बाबू के नाम से जाने जाते हैं।
- Written By: मनोज आर्या
जनता दल यूनाइटेड, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Janata Dal United: बिहार की राजनीति में जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) पिछले दो दशकों से एक प्रमुख पार्टी की भूमिका में रही है। इसके मुखिया नीतीश कुमार हैं, जो ‘सुशासन बाबू’ के नाम से जाने जाते हैं और लंबे समय से राज्य के मुख्यमंत्री हैं। JDU की भूमिका गठबंधन बदलने की भी रही है। 2015 में, JDU ने RJD और कांग्रेस के साथ ‘महागठबंधन’ बनाकर चुनाव लड़ा और 71 सीटें जीतीं। हालांकि, 2017 में वह NDA में वापस आ गई।
2020 के विधानसभा चुनाव में JDU की सीटों की संख्या घटकर 43 रह गई, जबकि उसकी सहयोगी भाजपा ने 74 सीटें जीतीं। इसके बावजूद, नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने। यह चुनाव JDU की स्थिति में बदलाव का प्रतीक था, जहां राज्य में पहली बार NDA ‘छोटे भाई’ की भूमिका में नजर आई। इन उतार-चढ़ावों के बावजूद, JDU बिहार में सरकार बनाने के लिए NDA का एक अनिवार्य घटक बनी हुई है।
बिहार की NDA का नेतृत्व
जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) वैसे तो बिहार का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दल है, लेकिन इसको बिहार के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश में भी राज्य-स्तरीय पार्टी का दर्जा प्राप्त है। यह दल मुख्य रूप से बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ रखता है, जहां वर्तमान में यह सत्ताधारी एनडीए का नेतृत्व कर रहा है। 2019 के लोकसभा चुनावों में 16 सीटों के साथ, जदयू ने 17वीं लोकसभा में सातवें सबसे बड़े दल के रूप में अपनी पहचान बनाई थी।
सम्बंधित ख़बरें
नीतीश कुमार का बदला पता: 20 साल बाद छोड़ा ‘एक अणे मार्ग’, अब लालू-राबड़ी के पड़ोसी बने पूर्व मुख्यमंत्री
जगद्गुरु रामभद्राचार्य की बड़ी भविष्यवाणी; क्या CM सम्राट चौधरी पूरा कर पाएंगे अपना कार्यकाल? जानें क्या कहा!
बिहार की राजनीति में ‘निशांत’ की एंट्री! तेजस्वी ने नीतिश को घेरा तो बेटे ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
लालू पुत्र न होते तो वॉर्ड भी नहीं जीतते, तेजस्वी के आरोपों पर JDU अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का करारा पलटवार
स्थापना और दलों का विलय
जदयू का गठन 1999 में जनता दल के शरद यादव गुट, लोकशक्ति पार्टी और समता पार्टी के विलय के बाद हुआ था। 1999 के आम चुनावों के दौरान, कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री जे.एच. पटेल के नेतृत्व में जनता दल के एक धड़े ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का फैसला किया, जिससे जनता दल दो फाड़ हो गया। एक धड़ा एच.डी. देवेगौड़ा के नेतृत्व में जनता दल (सेक्युलर) बना, जबकि दूसरा शरद यादव के नेतृत्व में उभरा। बाद में, शरद यादव का जनता दल गुट, लोकशक्ति पार्टी और समता पार्टी एक साथ आए और 30 अक्टूबर 2003 को जनता दल (यूनाइटेड) का गठन किया।
पार्टी का चुनाव चिह्न ‘तीर’ और झंडा हरे-सफेद रंग का पंजीकृत हुआ। हालांकि, चुनाव आयोग द्वारा समता पार्टी के विलय को रद्द किए जाने के बाद, ब्रह्मानंद मंडल राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। लेकिन स्वास्थ्य कारणों से पार्टी की बागडोर उदय मंडल के हाथों में चली गई।
NDA के साथ जदयू का गठबंधन
जदयू बाद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बन गया। इस गठबंधन ने 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की सरकार को हराकर सत्ता हासिल की। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में नई सरकार बनी। 2009 के लोकसभा चुनावों में, जदयू-भाजपा गठबंधन को बिहार में 32 सीटें मिलीं (जदयू को 20, भाजपा को 12)। इसके बाद, 2010 के बिहार विधानसभा चुनावों में, जदयू ने 115 और भाजपा ने 91 सीटें जीतीं, जिससे 243 सदस्यीय विधानसभा में कुल 206 सीटें हासिल कर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एक बार फिर सरकार बनी।
NDA से अलगाव और महागठबंधन का उदय
2014 के आम चुनाव से पहले, भाजपा द्वारा नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार समिति का प्रमुख बनाए जाने के विरोध में, जदयू ने बिहार में भाजपा के साथ 17 साल पुराने अपने गठबंधन को समाप्त कर दिया। इसके परिणामस्वरूप शरद यादव ने एनडीए के संयोजक का पद छोड़ दिया। लोकसभा चुनावों में जदयू ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से उसे केवल दो पर ही सफलता मिली, जबकि भाजपा और उसके सहयोगियों ने 32 सीटें जीतीं। इस असफलता के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और जीतन राम मांझी नए मुख्यमंत्री बने। जब भाजपा ने इस सरकार से बहुमत साबित करने की मांग की, तो राजद ने जदयू को समर्थन देकर सरकार को गिरने से बचाया।
2014 के लोकसभा चुनावों की असफलता के बाद, जदयू और राजद करीब आए। 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में, जदयू, राजद और कांग्रेस ने मिलकर एनडीए के खिलाफ ‘महागठबंधन’ का ऐलान किया। इस गठबंधन को 178 सीटों पर प्रचंड जीत मिली और नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
NDA में वापसी और हालिया चुनाव
26 जुलाई 2017 को, नीतीश कुमार ने 20 महीने पुराने महागठबंधन को समाप्त करते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। अगले ही दिन, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से फिर से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 28 जुलाई 2017 को, बिहार की एनडीए सरकार ने विधानसभा में 108 के मुकाबले 131 वोटों से अपना बहुमत साबित किया।
ये भी पढ़ें: जब सीएम पद छोड़ने का बढ़ा दबाव, तो लालू यादव ने खड़ी कर दी नई पार्टी; जानें कैसे हुई RJD की शुरुआत
2019 के लोकसभा चुनाव में, जदयू ने भाजपा और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के साथ गठबंधन करके बिहार में चुनाव लड़ा। इस गठबंधन को 39 सीटें जीतकर प्रचंड सफलता मिली (भाजपा 17, लोजपा 6, जदयू 16)। जदयू को केवल किशनगंज की सीट पर हार का सामना करना पड़ा। बिहार विधानसभा चुनाव, 2020 में भी जदयू ने भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के तहत ही चुनाव लड़ा। इन चुनावों में जदयू ने 115, भाजपा ने 110, विकासशील इंसान पार्टी (VIP) ने 11 और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने 7 सीटों पर चुनाव लड़ा।
