Nitish Kumar Filing Nomination (Image Source: IANS)
Amit Shah On Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज है। इस बीच गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित एनडीए के सभी पांचों उम्मीदवारों ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। इस मौके पर अमित शाह भी मौजूद रहे, उन्होंने नीतीश कुमार की तारीफ के पुल बांधे।
अमित शाह ने नीतीश कुमार को जंगलराज खत्म करने वाला बताया और साथ ही कहा कि लंबे अरसे के बाद नीतीश कुमार फिर से एक बार राष्ट्रीय राजनीति में राज्यसभा सांसद के नाते प्रवेश करेंगे।
अमित शाह ने नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की उन्होंने नीतीश कुमार के कार्यकाल को स्वर्णिम बताया और कहा कि 2005 से लेकर आज तक नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री रहे। उनका यह कार्यकाल बिहार के इतिहास में स्वर्णिम पुष्ठ के रूप में लिखा जाएगा और बिहार के विकास के सारे मायने को उन्होंने गति देने का काम किया है। उन्होंने अपने शासनकाल में बिहार को जंगलराज से मुक्त करने का काम किया।
#WATCH | पटना, बिहार: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “आज मैं पटना में श्री नितिन नवीन-राष्ट्रीय अध्यक्ष भाजपा, नीतीश कुमार-बिहार के मुख्यमंत्री , रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश कुमार के राज्यसभा नामांकन के लिए यहां पर आया हूं।नितिन नवीन राज्य में लंबे समय तक यशश्वी… pic.twitter.com/w6sQpgHrwF — ANI_HindiNews (@AHindinews) March 5, 2026
शाह ने आगे कहा कि नीतीश कुमार ने लंबे राजनीतिक जीवन में सादगी और ईमानदारी की मिसाल पेश की। विधायक से मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक रहते हुए उन्होंने विकास और सुशासन पर लगातार काम किया।
अमित शाह ने आगे कहा कि नीतीश कुमार के काल में बिहार को जंगलराज से मुक्त करने का काम किया गया। उन्होंने न केवल बिहार की सड़कों को गांव तक जोड़ा, उसकी स्थिति में भी सुधार किया। इतने लंबे कार्यकाल में विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री रहते हुए उनके कुर्ते पर कभी दाग नहीं लगा। भ्रष्टाचार का आरोप लगे बिना इतना लंबा राजनीतिक सफर शायद ही किसी ने तय किया हो जो नीतीश कुमार ने तय किया है। बिहार के हर गांव, हर घर में बिजली पहुंचाने में भी उनका बहुत बड़ा योगदान रहा। हमेशा नीतीश कुमार सादगी, सूचिता और सार्वजनिक जीवन के उच्चतम मूल्यों के पक्षधर रहे जिनका पालन उन्होंने भी किया।
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बिहार की राजनीति में यह एक अनएक्सपेक्टेड ट्विस्ट देखने को मिला। अब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले से एक सवाल और भी गहरा गया है और वो यह कि एनडीए के अंदर नेतृत्व का स्वरूप क्या होगा?
ऐसा देखा गया है कि बिहार में जेडीयू निर्णायक भूमिका निभाती थी लेकिन नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद भाजपा निर्णायक भूमिका में आ गई है।