राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते सड़क हादसे, छह महीनों में कई मौतें

Highway Accidents: नितिन गडकरी ने राज्यसभा में इस बात का खुलासा किया कि साल 2025 की पहली छमाही में देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुए सड़क हादसों में 26,770 लोगों की मौत हुई है। जो चिंता का विषय है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते सड़क हादसे, छह महीनों में कई मौतें: सरकार ने उठाए सख्त कदम
देश में हो रही सड़क दूरी धड़कना। (सौ. Design)
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Highway Accidents: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार, 23 जुलाई 2025 को राज्यसभा में इस बात का खुलासा किया कि साल 2025 की पहली छमाही यानी जनवरी से जून तक में देश के राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) पर हुए सड़क हादसों में 26,770 लोगों की मौत हुई है। वहीं, साल 2024 में इस आकड़ा में 52,609 गंभीर दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं। ऐसे में सरकार अब इन हादसों की रोकथाम के लिए नई तकनीकों, नियमों और जन जागरूकता अभियानों पर ज़ोर देने के लिए काम करने वाली है।

ATMS तकनीक से हादसों पर लगाम

नितिन गडकरी ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देश के व्यस्त और महत्वपूर्ण हाईवे व एक्सप्रेसवे पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) लागू किया है। इनमें दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, ट्रांस-हरियाणा, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे रास्ते शामिल हैं। उन्होंने बताया, “ATMS सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी उपकरण लगे होते हैं, जो किसी भी दुर्घटना या आपात स्थिति की सूचना तत्काल देते हैं। इससे तुरंत मदद पहुंचाई जा सकती है और कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।”

पुराने प्रोजेक्ट्स में भी ATMS

नितिन गडकरी ने कहा कि सभी नए हाई-डेंसिटी व हाई-स्पीड कॉरिडोर में अब ATMS को अनिवार्य रूप से जोड़ा गया है। वहीं, पुराने हाईवे पर इसे अलग प्रोजेक्ट के तहत लागू किया जा रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पिछले तीन सालों में 1,12,561 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का रोड सेफ्टी ऑडिट किया जा चुका है, जिससे ब्लैक स्पॉट की पहचान कर सुधार किया जा सके।

दोपहिया वाहनों के सबसे ज्यादा हादसे

भारत में इस समय सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुकी हैं। साल 2022 में 4.5 लाख से अधिक सड़क हादसों में 1.5 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इन हादसों में सबसे ज़्यादा दोपहिया वाहनों के हादसे दर्ज किए गए। तेज़ रफ्तार, बिना हेलमेट बाइक चलाना और पैदल यात्रियों द्वारा लापरवाही से सड़क पार करना इसके प्रमुख कारणों में से एक हैं।

सरकार अब सड़क सुरक्षा को लेकर कड़े ट्रैफिक नियम, टेक्नोलॉजी और जन-जागरूकता अभियानों पर ज़ोर दे रही है ताकि आने वाले सालों में सड़क हादसों की संख्या को काफी हद तक घटाया जा सके और लोगों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जा सकें।

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