

भारत सरकार ने राइड हेलिंग सेवाओं जैसे Ola और Uber को लेकर एक अहम निर्णय लिया है। नए नियम के अनुसार, ऐप बेस्ड कैब सेवाओं में चलने वाली गाड़ियां अब रजिस्ट्रेशन की तारीख से केवल 8 साल तक ही व्यवसायिक रूप से इस्तेमाल की जा सकेंगी। चाहे गाड़ी तकनीकी रूप से पूरी तरह फिट हो, फिर भी 8 साल पूरे होने पर वह कमर्शियल सेवा से रिटायर मानी जाएगी। यह नियम देशभर में लागू किया जाएगा।
इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ ओला-उबर से सफर करने वाले यात्रियों को मिलेगा। अब उन्हें पुरानी और असुरक्षित टैक्सियों की बजाय नई, आधुनिक और सेफ गाड़ियां मिलेंगी। पुराने वाहनों में अक्सर जरूरी सेफ्टी फीचर्स नहीं होते, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठता है। इसके अलावा, पुराने वाहन अधिक प्रदूषण फैलाते हैं। नए नियम के चलते सड़कों पर कम उम्र की गाड़ियां रहेंगी, जिससे प्रदूषण में भी कमी आने की संभावना है।
जहां यात्रियों को फायदा है, वहीं ड्राइवर्स के लिए यह फैसला भारी नुकसान लेकर आ सकता है। ऐसे ड्राइवर्स जिन्होंने हाल ही में नई गाड़ी खरीदी है और अब तक उसकी EMI चुकानी बाकी है, उन्हें अब 8 साल के भीतर वाहन बदलना पड़ेगा। बिना सरकारी सहायता के ऐसे ड्राइवर्स की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है और कुछ को तो मजबूरी में टैक्सी सेवा बंद करनी पड़ सकती है।
ओला और उबर के डेटा के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म्स पर लगभग 20% टैक्सियां ऐसी हैं जो 8 साल से अधिक पुरानी हैं। अब या तो उन्हें रिप्लेस किया जाएगा, या निजी उपयोग के लिए रखा जाएगा।
नए नियमों के चलते कई ड्राइवर्स इलेक्ट्रिक टैक्सियों की ओर रुख कर सकते हैं। EVs को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई राज्यों में सब्सिडी और टैक्स में छूट भी देती है। इससे यह विकल्प लॉन्ग टर्म में किफायती साबित हो सकता है।
पिछले वर्षों में सरकार ने ओला और उबर जैसी ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं को रेगुलेट करने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। सबसे उल्लेखनीय फैसला 2020 में आया था जब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने Motor Vehicle Aggregator Guidelines जारी की थीं। इन दिशा-निर्देशों के तहत कंपनियों को सर्ज प्राइसिंग, कंपनी की कमाई की सीमा, ड्राइवर वर्किंग ऑवर्स, और ग्राहक सेवा शुल्क जैसे पहलुओं को नियंत्रित करने के लिए कहा गया।
इन गाइडलाइंस का उद्देश्य उपभोक्ताओं को उचित किराया, बेहतर सेवा, और ड्राइवर्स को काम करने की उचित शर्तें उपलब्ध कराना था। इसके अलावा सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐप-आधारित टैक्सी कंपनियों को राज्य परिवहन विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।