जोहरान ममदानी और उमर खालिद (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

न्यूयॉर्क के मेयर Zohran Mamdani ने जेल में बंद उमर खालिद को लिखा पत्र, कहा- हम आपके साथ हैं

Umar Khalid Letter: न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने शपथ ग्रहण के दिन जेल में बंद उमर खालिद को पत्र लिखकर समर्थन जताया। उन्होंने खालिद की लंबी हिरासत पर चिंता व्यक्त करते हुए परिवार को ढांढस बंधाया।

प्रिया सिंह

Zohran Mamdani Writes to Umar Khalid: न्यूयॉर्क शहर के नवनियुक्त मेयर जोहरान ममदानी ने तिहाड़ जेल में बंद JNU के पूर्व छात्र उमर खालिद को एक भावुक पत्र लिखा है। यह पत्र सोशल मीडिया पर उसी दिन सार्वजनिक किया गया जब ममदानी ने न्यूयॉर्क के मेयर के रूप में अपने पद की शपथ ली। ममदानी ने अपने संदेश में खालिद की लंबी हिरासत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उनके परिवार के प्रति एकजुटता दिखाई है। भारतीय मूल के डेमोक्रेट नेता ममदानी पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खालिद के न्यायिक अधिकारों की वकालत कर चुके हैं।

मुलाकात और पुरानी यादों का जिक्र

जोहरान ममदानी ने अपने पत्र में उमर खालिद के माता-पिता से हुई पिछली मुलाकात को एक महत्वपूर्ण अनुभव बताया है। उन्होंने लिखा कि वे अक्सर खालिद द्वारा कही गई बातों और उनके संघर्ष को याद करते हैं जिससे उन्हें प्रेरणा मिलती है। मेयर ने संदेश दिया कि न्यूयॉर्क में भी लोग उनकी स्थिति के बारे में निरंतर सोच रहे हैं।

न्यायिक प्रक्रिया और लंबी हिरासत पर सवाल

ममदानी ने खालिद की बिना मुकदमे के चार साल से अधिक की हिरासत को न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना करार दिया है। उन्होंने जून 2023 में न्यूयॉर्क के एक कार्यक्रम में खालिद के जेल से लिखे पत्रों के अंश पढ़कर वैश्विक ध्यान खींचा था। उनका मानना है कि इतनी लंबी अवधि तक किसी को बिना सजा के बंद रखना मानवाधिकारों का मुद्दा है।

अमेरिकी सांसदों का बढ़ता वैश्विक दबाव

उमर खालिद की रिहाई के समर्थन में केवल ममदानी ही नहीं बल्कि आठ अन्य अमेरिकी सांसद भी भारत सरकार को पत्र लिख चुके हैं। इन सांसदों ने वाशिंगटन में भारतीय राजदूत को पत्र भेजकर खालिद की सुरक्षा और कानूनी स्थिति पर चिंता जताई थी। ममदानी का यह ताजा पत्र इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर से चर्चा में ले आया है।

यूएपीए आरोपों और अदालती कार्यवाही का हाल

उमर खालिद को सितंबर 2020 में दिल्ली दंगों की साजिश के आरोप में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था। तब से अदालतों ने उनकी नियमित जमानत याचिकाओं को कई बार खारिज किया है, हालांकि उन्हें अंतरिम राहत मिलती रही है। ममदानी ने इस लंबी कानूनी लड़ाई को व्यक्तिगत और राजनीतिक अधिकारों के हनन के रूप में देखा है।

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