शौचालय के पास लीकेज, मल-मूत्र वाले बैक्टीरिया से फैला हैजा...इंदौर जलकांड पर रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Indore Water Contamination Lab Report: इंदौर के भागीरथपुरा में पानी सप्लाई को लेकर लैब रिपोर्ट आ गई है। उसमें यह साफ हो गया है कि पेयजल में गंदा पानी मिला था। साथ ही खतरनाक बैक्टरिया भी था।
Indore Water Contamination Lab Report
इंदौर जलकांड (Image- Social Media)
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Indore Water Crisis: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की साख पर अब 'जहरीले' पानी का गहरा दाग लग गया है। ताजा लैब टेस्ट से यह पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा इलाके में मची तबाही का कारण दूषित पेयजल ही था। इंदौर में डायरिया फैलने से अब तक 14 लोगों की मौत हो गई और 1400 से अधिक लोग इससे प्रभावित हुए हैं।

टेस्ट के परिणामों से यह साबित हुआ है कि मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी के कुछ हिस्सों में पीने के पानी की सप्लाई व्यवस्था में खामियां हैं, जो इस हादसे का कारण बनी। इंदौर के चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि शहर के एक मेडिकल कॉलेज द्वारा किए गए लैब टेस्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा इलाके में एक पाइपलाइन में लीकेज के कारण पानी दूषित हो गया था, और वहीं से बीमारी फैलने की खबर आई।

शौचालय के पास पाइपलाइन में लीकेज

भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पीने के पानी की पाइपलाइन में लीकेज पाया गया था, जो एक शौचालय के पास स्थित थी। इस लीकेज के कारण पानी की सप्लाई दूषित हो गई, जिससे इलाके में संक्रमण फैलने की समस्या हुई। अधिकारियों ने पाइपलाइन की बारीकी से जांच शुरू कर दी है और यह सुनिश्चित करने के लिए सर्वे किया जा रहा है कि कहीं और भी किसी पाइपलाइन में लीकेज तो नहीं है।

पानी के सैंपल की जांच और एहतियाती कदम

अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने न्यूज एजेंसी से कहा, "हम भागीरथपुरा में पूरी पानी सप्लाई पाइपलाइन की जांच कर रहे हैं ताकि कोई और लीकेज की स्थिति का पता लगाया जा सके।" उन्होंने बताया कि गुरुवार को इस इलाके के घरों में साफ पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है, लेकिन एहतियात के तौर पर लोगों को सलाह दी गई है कि वे पानी को उबालकर ही पिएं। "हमने पानी के सैंपल भी लिए हैं और उन्हें जांच के लिए भेजा है," दुबे ने कहा।

SOP तैयार करने की योजना

भागीरथपुरा में पानी से हुई त्रासदी से सबक लेते हुए, सीनियर अफसरों ने बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पूरे राज्य में एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर दुबे ने स्थिति का जायजा लेने के लिए भागीरथपुरा का दौरा किया और अधिकारियों से बातचीत की।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया गया सर्वे

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को भागीरथपुरा के 1714 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 8571 लोगों की जांच की गई। इनमें से 338 लोगों में उल्टी और दस्त के हल्के लक्षण पाए गए, जिनका इलाज घर पर ही किया गया। अधिकारी ने बताया कि बीमारी फैलने के आठ दिनों में 272 मरीजों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 71 को अब तक डिस्चार्ज किया जा चुका है। फिलहाल 201 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 32 को इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में रखा गया है।

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