होर्मुज के ऊपर से गायब हुआ अमेरिका का जासूसी ड्रोन (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

सीजफायर के बीच बड़ा कांड...इमरजेंसी कोड भेजकर लापता हुआ अमेरिकी ड्रोन, ईरान पर हैक करने का शक

US-Iran War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर अमेरिका का $200 मिलियन का MQ-4C ट्राइटन ड्रोन रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया। इमरजेंसी कोड भेजने के बाद ड्रोन के ईरान की ओर मुड़ने से हड़कंप मच गया है।

अक्षय साहू

US Drone Missing Persian Gulf: अमेरिका और ईरान के बीच जारी नाजुक सीजफायर के बीच एक अहम घटना ने क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी नौसेना का एडवांस्ड जासूसी ड्रोन MQ-4C ट्राइटन अचानक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ऊपर पर्शियन गल्फ से गायब हो गया। यह ड्रोन निगरानी मिशन पर था और लगभग तीन घंटे तक क्षेत्र की उड़ान भरने के बाद लौट रहा था, लेकिन अचानक इसमें तकनीकी गड़बड़ी हुई और यह ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम से गायब हो गया।

जानकारी के मुताबिक,  गायब होने से ठीक पहले इसे तेजी से नीचे गिरते हुए देखा गया लगभग 50,000 फीट की ऊंचाई से 10,000 फीट से भी नीचे। इस ड्रोन के खोने से अमेरिका को लगभग 200 मिलियन डॉलर यानी करीब 18.53 अरब रुपये का नुकसान हुआ है।

ड्रोन ने भेजा था इमरजेंसी कोड

द वार जोन की रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन ने इस दौरान 7700 कोड भेजा, जो इमरजेंसी स्थिति का संकेत देता है। कुछ रिपोर्ट्स में पहले 7400 कोड आने की बात भी कही गई, जो कंट्रोल से संपर्क टूटने का संकेत होता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ड्रोन के साथ आखिर क्या हुआ। अमेरिकी नौसेना ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, जिससे रहस्य और गहरा गया है। डेटा से पता चला है कि ड्रोन इटली के सिगोनेला एयरबेस से उड़ा था और मिशन पूरा करने के बाद लौट रहा था। लेकिन सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र में आते ही यह अचानक दिशा बदलकर ईरान की ओर मुड़ गया। इस दौरान तकनीकी गड़बड़ी या बाहरी हस्तक्षेप की संभावना जताई जा रही है, यानी यह आशंका है कि कहीं ईरान ने इसे कब्जे में तो नहीं लिया। इससे पहले भी 2019 में ईरान ने पहले भी एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया था।

कितना खास है MQ-4C Triton ड्रोन

MQ-4C Triton एक अत्याधुनिक अमेरिकी सर्विलांस ड्रोन है, जिसे समुद्री इलाकों में लंबी दूरी तक निगरानी के लिए बनाया गया है। यह लगभग 50,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ सकता है और 24 घंटे से अधिक समय तक लगातार निगरानी कर सकता है।

इसके अलावा इसमें AESA रडार, हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा, इन्फ्रारेड सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सिस्टम लगे हैं, जो दिन-रात और हर मौसम में काम करते हैं। यह दुश्मन के जहाज, पनडुब्बी और सिग्नल तक को ट्रैक कर सकता है और रियल टाइम जानकारी सेना तक पहुंचाता है। हालांकि, यह हथियारबंद नहीं होता और जामिंग या हमले की स्थिति में कमजोर हो सकता है।

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