

Pyare Khan On Allahabad High Court Hijab Verdict: इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा स्कूल परिसर में हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली एक छात्रा की याचिका को खारिज किए जाने के बाद देश में सियासी पारा गरमा गया है। इस फैसले के बाद सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक गलियारों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना की। वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान इस मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा स्कूल में हिजाब पहनने की एक छात्रा की याचिका खारिज किए जाने पर महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन प्यारे खान कहा कि इस्लाम की अवधारणा बुर्का नहीं है; इस्लाम की अवधारणा पर्दा है।
महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन प्यारे ने कहा कि मैंने भी कई मुस्लिम विद्वानों, उलेमाओं से बात की और इस बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि इस्लाम का कॉन्सेप्ट बुर्का नहीं है; इस्लाम की अवधारणा पर्दा है।
प्यारे खान ने इस समझाते हुए कहा कि इस्लाम का कॉन्सेप्ट पर्दा है। वह पर्दा आंखों का पर्दा हो सकता है, कपड़ों का पर्दा हो सकता है, और पर्दा कई अन्य तरीकों से भी हो सकता है, जब तक हमारी आंखों में हया है।
यह पूरा मामला तब चर्चा में आया जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक स्कूल छात्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की इजाजत मांगी थी। यह याचिका प्रयागराज के एक प्राइवेट स्कूल की नाबालिग छात्रा ने दायर की थी। इस छात्रा ने हाई स्कूल पास कर लिया है। अब वह उसी स्कूल में 11वीं कक्षा में एडमिशन लेना चाहती है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जेजे मुनीर और इंद्रजीत शुक्ला की दो जजों वाली बेंच ने इस दलील को खारिज कर दिया कि सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लाम की एक जरूरी प्रथा है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों को अपने परिसर के भीतर एक समान यूनिफॉर्म कोड लागू करने का पूरा अधिकार है।
साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जहां भी यह मुद्दा उठा है उच्च न्यायालयों की राय एक रही है कि महिलाओं के लिए सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लामिक आस्था का कोई जरूरी हिस्सा नहीं है, जिसके बिना आस्था खतरे में पड़ जाए।