अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में 11 भारतीय मूल के नेताओं ने किस्मत आजमाई
पिया डंडिया, सुहास सुब्रमण्यम और अरुणा मिलर ने चुनाव में जीत हासिल की
विवेक रामास्वामी ओहियो में रिपब्लिकन पार्टी से गवर्नर पद के उम्मीदवार हैं
Indian Americans in US Midterm Elections: अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान हुआ था, आज इसके नतीजे सामने आने लगे हैं। इस चुनाव में जनता ने भारतीय मूल के नेताओं पर जमकर भरोसा दिखाया है। मध्यावधि चुनाव में 11 भारतीय मूल के नेता अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें से पिया डंडिया, अरुणा मिलर और सुहास सुब्रमण्यम वे नेता रहे जिन्होंने जीत भी हासिल कर ली है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव ने डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन, दोनों पार्टियों ने भारतीय मूल के नेताओं पर दांव लगाया है। इस चुनाव में एक ओर जहां रो खन्ना और प्रमिला जयपाल जैसे पुराने नेता शामिल हैं। वहीं, डॉ. अमी बेरा, सुहास सुब्रमण्यम, विवेक रामास्वामी, सरिता कोमातिरेड्डी, नित्या रमन, पूजा सेठी, संदीप श्रीवास्तव, पिया डंडिया और अमीश शाह जैसे नई पीढ़ी के नेता भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। विवेक रामास्वामी के लिए तो खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रचार किया था।
मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के नेता सांसद से लेकर मेयर और गर्वनर तक का चुनाव लड़ रहे हैं।
चुनावी मैदान में उतरे भारतीय मूल के प्रमुख चेहरे
रो खन्ना (कैलिफोर्निया): डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख नेता रो खन्ना सिलिकॉन वैली के 17वें जिले से दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। उनके दादा स्वतंत्रता सेनानी थे और महात्मा गांधी के साथ जेल गए थे।
प्रमिला जयपाल (वाशिंगटन): चेन्नई में जन्मीं प्रमिला जयपाल वाशिंगटन के 7वें जिले से चुनाव मैदान में हैं। वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने वाली दूसरी भारतीय-अमेरिकी महिला हैं।
डॉ. अमी बेरा (कैलिफोर्निया): गुजराती मूल के डॉक्टर अमी बेरा कैलिफोर्निया के तीसरे जिले से डेमोक्रेट उम्मीदवार हैं। भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है।
सुहास सुब्रमण्यम (वर्जीनिया): साल 2024 में अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी बनकर इतिहास रचने वाले सुहास इस बार भी अपनी सीट बचाने के लिए मैदान में हैं।
विवेक रामास्वामी (ओहियो): रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी ओहियो के गवर्नर पद की दौड़ में हैं। उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन हासिल है।
सरिता कोमातिरेड्डी (न्यूयॉर्क): हार्वर्ड से पढ़ीं पूर्व संघीय अभियोजक सरिता कोमातिरेड्डी रिपब्लिकन पार्टी की ओर से अटॉर्नी जनरल पद की उम्मीदवार हैं।
नित्या रमन (लॉस एंजिलिस): शहरी योजनाकार नित्या रमन लॉस एंजिलिस के मेयर पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं। वह शहर की पहली दक्षिण एशियाई महिला पार्षद रह चुकी हैं।
पूजा सेठी और संदीप श्रीवास्तव (टेक्सास): डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से पूजा सेठी जिला 47 और संदीप श्रीवास्तव जिला 66 से चुनाव लड़ रहे हैं।
पिया डंडिया (फ्लोरिडा) और डॉ. अमीश शाह (एरिजोना): पिया डंडिया शिक्षा के मुद्दों पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि अमीश शाह एरिजोना के पहले जिले से डेमोक्रेट उम्मीदवार हैं।
अरुणा मिलर (मैरीलैंड): भारत के आंध्र प्रदेश में जन्मीं अरुणा मिलर मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर हैं। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं। 2026 के चुनाव में वह गवर्नर वेस मूर के साथ दोबारा चुनाव मैदान में उतरी हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार पिया डांडिया ने फ्लोरिडा से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीत लिया है। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के मरीन वेटरन (पूर्व मरीन सैनिक) केसी अस्कार को हराया। पिया को चुनाव में 51.9 प्रतिशत वोट मिले।
पिया के माता-पिता भारत से आकर अमेरिका में बसे थे। पिया इससे पहले एक हाई स्कूल की प्रिंसिपल के तौर पर काम कर चुकी हैं। इस हाई स्कूल की स्थापना उन्होंने छात्रों के जीवन की दिशा बदलने के मकसद से की थी।
पिया डांडिया के अलावा भारतीय मूल के सुहास सुब्रमण्यम ने भी वर्जीनिया से चुनाव जीत लिया है। सुब्रमण्यम को अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का सदस्य फिर से चुन लिया गया है। वह पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार के रूप में काम कर चुके हैं।
अरुणा मिलर डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता हैं। मैरीलैंड की जनता ने उन्हें एक बार फिर लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में फिर से चुना है। अरुणा मिलर ने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब क्रोप को हराया है। अरुणा का जन्म भारत के हैदराबाद में हुआ था। वह भारतीय मूल की हैं, जिन्होंने अमेरिका में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
इस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा ओहियो से गवर्नर पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी हैं। विवेक ने इससे पहले राष्ट्रपति चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन वह प्राइमरी इलेक्शन में डोनाल्ड ट्रंप से हार गए थे।
हालांकि ट्रंप जब चुनाव जीतकर दूसरी बार राष्ट्रपति बने तब उन्होंने विवेक को एलन मस्क की अगुवाई वाले डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) में शामिल किया था। हालांकि, विवेक रामास्वामी जल्द ही ओहियो लौट आए थे क्योंकि उनकी इच्छा ओहियो के गवर्नर बनने की थी।