Proposed UN World Map: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के नक्शे को नए तरीके से प्रस्तुत करने से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य देशों और महाद्वीपों के आकार को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात में दिखाना है। इस प्रस्ताव पर भारत ने समर्थन में मतदान किया, लेकिन साथ ही अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर स्पष्ट रुख भी सामने रखा।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत के सभी संप्रभु क्षेत्रों का चित्रण केवल भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुरूप होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सीमाओं का कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
नए प्रस्ताव का मकसद मौजूदा नक्शों में देशों और महाद्वीपों के आकार को लेकर मौजूद असमानता को दूर करना है। खास तौर पर अफ्रीका जैसे भूमध्य रेखा के आसपास स्थित क्षेत्रों का आकार पारंपरिक नक्शों में वास्तविकता से छोटा दिखाई देता है।
टोगो की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र में 164 देशों का समर्थन मिला, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। छह देश- एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन- मतदान से अलग रहे।
दुनिया में लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे मर्केटर प्रोजेक्शन को 1569 में कार्टोग्राफर जेरार्डस मर्केटर ने समुद्री यात्राओं में दिशा और मार्ग समझने के लिए विकसित किया था। हालांकि, इसमें ध्रुवों के नजदीक मौजूद क्षेत्र वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखाई देते हैं।
उदाहरण के तौर पर ग्रीनलैंड नक्शे पर दक्षिण अमेरिका के लगभग बराबर दिखाई देता है, जबकि वास्तविक क्षेत्रफल के हिसाब से वह काफी छोटा है। इसी वजह से समान क्षेत्रफल दिखाने वाले नए प्रोजेक्शन पर जोर बढ़ा है।
2018 में 'Equal Earth' नाम का एक नया मानचित्र प्रोजेक्शन विकसित किया गया। इसका उद्देश्य पृथ्वी के विभिन्न क्षेत्रों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात में दिखाना है।
अफ्रीकी देशों ने भी इस तरह के मानचित्र को अपनाने की दिशा में समर्थन दिया है। फ्रांस ने भी नए प्रोजेक्शन का समर्थन किया है और जर्मन कार्टोग्राफर मैक्स एकर्ट के Eckert IV प्रोजेक्शन के इस्तेमाल की बात कही है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और संप्रभु क्षेत्र हैं।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए। भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी सीमाओं के किसी भी गलत या भ्रामक चित्रण का विरोध करेगा।
नए विश्व मानचित्र प्रस्ताव का मतलब किसी देश की जमीन या अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में बदलाव नहीं है। यह केवल पृथ्वी को दो-dimensional नक्शे पर दिखाने के वैज्ञानिक तरीके से जुड़ा विषय है।
इस बदलाव से भारत समेत किसी भी देश का वास्तविक क्षेत्रफल नहीं बदलेगा। हां, नए समान-क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्शन में भारत का आकार उत्तरी गोलार्ध के कुछ बड़े देशों की तुलना में पहले से अधिक संतुलित दिखाई दे सकता है।