

Nepal Massive Gorkha Flood Disaster: नेपाल के पहाड़ी गोरखा जिले में रविवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड नंबर 4 और 2 में थेरांग नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद चार घर और एक झूला पुल तेज बहाव में बह गए। घटना के बाद प्रशासन ने बूढ़ीगंडकी नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अलर्ट जारी किया है।
अचानक आई बाढ़ के कारण प्रभावित इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा लिया गया और इस घटना में किसी के प्रभावित होने की सूचना नहीं है।
रविवार सुबह पहाड़ी क्षेत्र में अचानक पानी बढ़ने के बाद थेरांग नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगी। देखते ही देखते नदी का पानी आसपास की बस्तियों तक पहुंच गया और तेज बहाव ने चार आवासीय घरों को पूरी तरह बहा दिया।
जिला पुलिस के अनुसार, बाढ़ में नमरुंकनुरबू ओंग्याल यानी नुरबू त्शिरिंग का घर भी बह गया। इसके अलावा उर्गेन छायोडेन, लकपा भूती और दोरजे ग्यालजेन के घर भी बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो गए।
जिला पुलिस कार्यालय के प्रमुख और पुलिस उप अधीक्षक राजकुमार श्रेष्ठ ने बताया कि घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है। उन्होंने कहा कि नदी का जलस्तर बढ़ने और खतरे की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोग समय रहते सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए थे।
प्रशासन की शुरुआती चेतावनी ने बड़े जानमाल के नुकसान को टालने में अहम भूमिका निभाई। फिलहाल स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और जरूरी संपर्क बहाल करने में जुटी हैं।
बाढ़ के तेज बहाव में एक झूला पुल भी पूरी तरह बह गया। इस पुल के टूटने से मनासलु क्षेत्र में पैदल यात्रा करने वाले स्थानीय लोगों और पर्यटकों की परेशानी बढ़ गई है।
मनासलु क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरी-भरी घाटियों, धान के खेतों और बर्फीले पहाड़ी दर्रों के लिए प्रसिद्ध है। यहां मौजूद प्राचीन बौद्ध मठ, गुम्पाएं, हिमनद और तिब्बती संस्कृति विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष निमा लामा ने कहा कि प्रशासन पैदल यात्रियों और पर्यटकों के लिए जल्द वैकल्पिक संपर्क व्यवस्था तैयार करेगा। प्रभावित क्षेत्र में अस्थायी उपायों के जरिए पैदल मार्ग को दोबारा चालू करने की कोशिश की जा रही है।
सहायक मुख्य जिला अधिकारी नेत्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि बाढ़ के साथ आया मलबा और गाद नदी के निकास मार्ग में जमा हो गया था। इससे पानी का प्रवाह कुछ समय के लिए बाधित हुआ।
चूंकि थेरांग नदी आगे जाकर बूढ़ी गंडकी नदी में मिलती है, इसलिए प्रशासन ने बूढ़ी गंडकी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जलस्तर पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।