एलन मस्क सोर्स- IANS
विदेश

सरकार ने एलन मस्क के आरोप का किया खंडन, कहा- सैटेलाइट कम्युनिकेशन पॉलिसी में कोई भेदभाव नहीं

Elon Musk Claim Rejected: भारत ने एलन मस्क द्वारा सैटेलाइट संंबंधित पॉलिसी के बारे में लगाए भेदभाव को खारिज कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत की नीतियां सभी के लिए समान है।

नितिन कुमार राय

Satellite Communication Policies: भारत सरकार के संचार मंत्रालय ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पर अपना रुख साफ कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि इस क्षेत्र में भारत की नीतियां निष्पक्ष और बिना भेदभाव का है। मंत्रालय का यह बयान SpaceX के CEO एलन मस्क की उस पोस्ट के बाद आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनकी सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी 'स्टारलिंक' की भारत में योजनाओं को 'कुछ रसूखदार लोगों' द्वारा रोका जा रहा है।

एलन मस्क की पोस्ट के बाद बयान

मंत्रालय का यह बयान SpaceX के CEO एलन मस्क की उस पोस्ट के बाद आया है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनकी सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी 'स्टारलिंक' के भारत में काम शुरू करने की योजनाओं को 'कुछ ताकतवर उद्योगपतियों' द्वारा रोका जा रहा है। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो द्वारा जारी एक बयान में मंत्रालय ने इस बात का खंडन किया गया। बयान में कहा कि सोशल मीडिया पर सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए भारत के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की निष्पक्षता को लेकर एक पोस्ट घूम रही है, जिसमें यह सुझाव दिया गया है कि इसे भेदभावपूर्ण तरीके से लागू किया जा रहा है।

भेदभाव-रहित फ्रेमवर्क बनाया गया

सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं सहित सभी टेलीकम्युनिकेशन सेवाओं के लिए एक निष्पक्ष और भेदभाव-रहित ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क बनाया है। इसके तहत, भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाएं उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता के हिस्से के तौर पर, नॉन-जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट ऑर्बिट आधारित सैटेलाइट कम्युनिकेशन पर काम करने वाली तीन ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट सेवाओं को टेलीकॉम लाइसेंस दिए गए हैं। लाइसेंस की शर्तों के अनुसार, ऐसे हर लाइसेंसधारी के लिए सुरक्षा शर्तों का पालन करना जरूरी है।

यूजर्स की डेटा की सुरक्षा के लिए मानक

सरकार ने स्पष्ट किया कि इसका मकसद यह पक्का करना है कि दी जाने वाली सेवाएं सभी यूजर्स और उनके डेटा की सुरक्षा के लिए जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करें। इस प्रक्रिया के हिस्से के तौर पर, तीनों लाइसेंसधारियों के लिए सुरक्षा जांच (सिक्योरिटी असेसमेंट) अभी चल रही है। जब किसी लाइसेंसधारी कंपनी के लिए यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तो वह स्पेक्ट्रम आवंटन के अगले चरण की ओर बढ़ सकती है। 

मस्क ने लगाया था भेदभाव का आरोप

बयान में कहा गया, "अभी, तीनों कंपनियां रेगुलेटरी प्रोसेस के लगभग एक ही स्टेज पर हैं। इसलिए, यह कहना कि फ्रेमवर्क या उसे लागू करने का तरीका गलत या भेदभावपूर्ण है, बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित है।" इससे पहले, X पर एक पोस्ट के जवाब में- जिसमें बताया गया था कि भारत को स्टारलिंक की जरूरत क्यों है। मस्क ने आरोप लगाया कि कंपनी को 'कुछ ताकतवर उद्योगपतियों' द्वारा रोका जा रहा है। ताकि वे भारतीय लोगों पर अपना एकाधिकार बनाए रख सकें।

हालांकि, संचार मंत्रालय ने एलन मस्क के दावे का खंडन कर दिया है। फ्रेमवर्क को भेदभाव रहित बताया है।

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